Raksha Bandhan 2022: राखी की थाली में जरुर शामिल करें ये 5 चीजें, लंबी आयु के साथ बढ़ेगी संपन्नता

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Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन, एक ऐसा त्योहार है जिसका इंतजार हर भाई -बहन बेसब्री से किया करते हैं। यह दिन भाई और बहन के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दिन बहन अपने भाइयों की कलाई पर उनकी लंबी उम्र की दुआ करते हुए राखी बांधती हैं जिसके बदले में भाई अपनी बहन की सुरक्षा का वादा करते हुए उन्हें उपहार देता है। यह त्योहार भाई -बहन के प्रेम और एक दूसरे के लिए सद्भावना को दर्शाता है। ऐसे में कहा जाता है कि रक्षाबंधन के दिन जितनी राखी जरुरी होती है उतनी ही राखी की थाली भी अपना एक अलग महत्व रखती है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, राखी की में थाली कुछ खास 5 चीजें होनी ही चाहिए जिनके बिना राखी की थाली अधूरी है और उन चीजों से आपके भाई की उम्र बढ़ने के साथ-साथ माँ लक्ष्मी की कृपा भी बरसती रहेगी। तो चलिए जानते है उन खास 5 चीजों के बारे में।

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सिंदूर तिलक

सिंदूर को माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है यहीं कारण है कि राखी की थाली में सिंदूर होना बेहद आवश्यक है। अपने भाई को सिंदूर का तिलक करने से भाई पर सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बरसती रहती है और कभी भी धन का अभाव नहीं होता ।

चंदन

ज्योतिष शास्त्र में चंदन को काफी शुभ और पवित्र माना जाता है। रक्षाबंधन पर भाई के माथे पर चंदन का तिलक लगाने से भाई का मन शांत रहता है और बहन-भाई पर भगवान विष्णु और गणेश की अपरंपार कृपा बरसती है। 

अक्षत

हमारे हिंदू धर्म में अक्षत को शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है । इसे राखी की थाली में जरूर शामिल करें। अक्षत लगाने से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और भाई लंबी उम्र की प्राप्ति के साथ-साथ संपन्नता को भी हासिल करते हैं इसके अलावा भाई  हर तरह की हानि से बचे भी रहते हैं।

राखी

राखी के बिना तो थाली क्या यह त्योहार भी अधूरा है। इस दिन बहन को भाई की कलाई पर राखी जरूर बांधनी चाहिए। इससे भाई के जीवन में संपन्नता आती है और सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है। राखी भाइयों के लिए एक तरह से रक्षा सूत्र का काम करती है इससे भाई हर कठिनाई से बचा रहता है।

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दीपक

दीपक में अग्निदेव का वास होता है और साथ ही इसे ऊर्जा और प्राण का प्रतीक भी माना जाता है। कहां जाता है कि किसी भी शुभ काम में दीप कार्य का साक्षी बनता है यही कारण है कि हिंदू शास्त्र में हर एक शुभ काम को करने के बाद आरती की जाती है। इससे नकारात्मक ऊर्जा का विनाश होता है ।

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