Homeएस्ट्रोलॉजीNavratra: नवरात्रि में अष्टमी का खास महत्व, गलती से भी ना करें...

Navratra: नवरात्रि में अष्टमी का खास महत्व, गलती से भी ना करें ये काम

देशभर में नवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है श्रद्धालु श्रद्धा में लीन है। नवरात्रि में अष्टमी का खास महत्व होता है।अष्टमी के दिन मां अंबे के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है। इस दिन कई लोग अपने घरों में हवन करते हैं। कहते हैं माता के इस स्वरूप की पूजा से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर नवरात्रि की अष्टमी की पूजा पाठ में थोड़ी सी भी चूक हुई तो बाकी दिन की आराधना व्यव चली जाती है इसलिए इस दिन कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

चलिए आपको बताते हैं कि अष्टमी की पूजा और व्रत के दौरान आपको किन बातों का खास खयाल रखना है ताकि आप पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहे।

वैसे तो नवरात्रि के दौरान ही सुबह नहाकर माता रानी का पाठ किया जाता है, लेकिन अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठना शुभ माना जाता है। इस दिन गलती से भी देर तक ना सोएं। अगर आप व्रत नहीं भी है तो भी उठकर जल्दी नहा लें और पूजा पाठ करें। पूजा के लिए साफ कपड़े पहनें. इस दिन शुभ मुहूर्त में ही पूजा करने का प्रयास करें. मुहूर्त बीतने के बाद पूजा का महत्व नहीं रह जाता है।

संधि काल का समय दुर्गा पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।संधि काल के वक्त 108 दिए जलाए जाते हैं। अष्टमी के दिन संधि काल में ही दीपक जलाना शुभ माना जाता है। संधि काल का ध्यान रखें।

विष्णु पुराण के मुताबिक अष्टमी पर पूजा के बाद दिन में सोना नहीं चहिए। ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलेगा।

अष्टमी के दिन हवन बिना पूजा करने की गलती ना करें। हवन किए बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। ध्यान रखें कि हवन करते वक्त आहुति की सामग्री कुंड से बाहर ना जाए।

अष्टमी पर पूरे मन से मां दुर्गा की आराधना करें। चालीसा, मंत्र या सप्तशती पढ़ते हुए बीच में किसी दूसरे से बात ना करें। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता है। इसके अलावा माता की चौकी का समापन भी पूरे विधि विधान से करना चाहिए।

अगर आपने अष्टमी का व्रत रखा है तो नवमी के दिन कन्या पूजन से पहले कुछ ना खाएं। कन्या पूजने और उन्हें विदा करने के बाद ही पूरे विधि से व्रत का पारण करना चाहिए। इससे माता रानी की कृपा बनी रहती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अगर आपने नवरात्रि के पूरे भजन व्रत रखे हैं तो आखरी दिन किसी भी तरह की गड़बड़ी ना दिखाएं। कई लोग अष्टमी पर रात 12:00 बजे ही व्रत का पारण कर लेते हैं जो कि गलत है। नवमी के दिन सुबह पूरे विधि-विधान के साथ ही व्रत खत्म करें। इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद पूरे विधि से हवन करें और कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही इसका समापन करें।

अष्टमी पर नीले या काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें। इस दिन पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है।

देश और दुनिया की तमाम खबरों के लिए हमारा YouTube Channel ‘DNP INDIA’ को अभी subscribe करें।आप हमें FACEBOOKINSTAGRAM और TWITTER पर भी फॉलो पर सकते हैं

Enter Your Email To get daily Newsletter in your inbox

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest पोस्ट

Related News

- Advertisement -spot_img