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Vishnu Puran: ‘कलयुग’ ही सर्वश्रेष्ठ युग, महर्षि व्यास ने इस तरह किया था सिद्ध

Vishnu Puran: हिंदू धर्म में समय को चार युगों में बांटा गया है। जिसमें सबसे पहले सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और अब कलयुग है। कहा जाता है कि सबसे ज्यादा पाप कलयुग में ही घटित होता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हिंदू पुराणों में कलयुग को सबसे श्रेष्ठ युग बताया गया है। हिंदू पौराणिक कथाओं में इसका वर्णन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक युग लाखों वर्षों का होता हैं। जैसे सतयुग लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष का था। इसके बाद त्रेतायुग लगभग 12 लाख 96 हजार वर्ष का था। फिर द्वापर युग करीब 8 लाख 64 हजार वर्ष का था और कलयुग को करीब 4 लाख 32 हजार वर्ष का बताया गया है।

कलयुग की श्रेष्ठता को लेकर ऋषि मुनि में हुआ था विवाद

विष्णु पुराण में बताया गया है कि एक बार ऋषि मुनि इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि कौन सा युग सबसे श्रेष्ठ है और इस चर्चा ने विवादास्पद का रूप ले लिया। विवाद के समाधान के लिए सभी ऋषि मुनि महर्षि व्यास के पास पहुंचे। उस समय महर्षि गंगा में स्नान कर रहे थे। जब उन्होंने ऋषि-मुनियों को आते हुए देखा तो जोर से बोले- “कलयुग ही सर्वश्रेष्ठ है, शूद्र ही श्रेष्ठतम है।” यह बात कह कर महर्षि व्यास गंगा नदी में डुबकी लगाने लगे और फिर बोले- “साधु तो केवल स्त्रियां है और सबसे धन्य भी वही है।”

कलयुग की श्रेष्ठता को महर्षि ने किया सिद्ध

जब व्यास जी स्नान करके हटे तो ऋषि मुनि ने कहा कि महर्षि आपने अभी जो कुछ भी कहा है उसका हमें सरल शब्दों में अर्थ बताएं। इसके बाद व्यास जी ने कहा कि “निस्वार्थ भाव से जप तप यज्ञ होम आदि पुण्य कार्य करने का जो फल सतयुग में 10 सालों में प्राप्त होता है वही फल त्रेता में 1 वर्ष, द्वापर में 1 महीने और कलियुग में मात्र एक ही दिन में सुलभ है। क्योंकि कलयुग को यह वरदान की प्राप्ति है कि कलयुग में केवल श्री हरि का नाम जपने से कल्याण हो जाएगा और उसे मुक्ति के लिए किसी भी साधन की आवश्यकता नहीं होगी। इसी वजह से कलयुग श्रेष्ट बताया गया हैं।

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शूद्र को श्रेष्ठ कहने का बताया कारण

शूद्र को श्रेष्ठ कहने का कारण ये है कि अन्य जातियों को वेदों के अध्ययन के लिए अनेकों साधन एवं तपस्या करनी पड़ती है परंतु शूद्र ब्राह्मण की सेवा और उनके आशीर्वाद से ही पुण्य बहुत ही सुलभता से प्राप्त किया जा सकता हैं। यही कारण है कि कलयुग में शूद्रों को श्रेष्ठ बताया गया है। इसी प्रकार जब स्त्रियां अपने पति की निष्ठा भाव से सेवा करती है तो पुण्य प्राप्त कर लेती हैं, इसलिए स्त्रियां धन्य है। इस प्रकार महर्षि व्यास ने ऋषि मुनि के कलयुग को श्रेष्ठ बताने की समस्या का समाधान बताया और कलयुग की श्रेष्ठता को सिद्ध किया।

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