Delhi Dehradun Expressway: देश के चर्चित एक्सप्रेसवे में से एक दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। बता दें कि ट्रायल के तौर पर इस रूट पर गाड़ियों का संचालन लगातार जारी है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की दूरी केवल 2.5 से 3 घंटे की रह जाएगी। माना जा रहा है कि मार्च तक पीएम मोदी इस एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखा सकते है। हालांकि अधिकारिक तौर पर तारीख का अभी तक ऐलान नहीं किया गया है। अब खबर सामने आ रही है कि इस एक्सप्रेसवे को चारधाम से कनेक्ट किया जाएगा। जिससे बड़ी संख्या में लाखों श्रद्धालु हर साल चारधाम की यात्रा करते है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
Delhi Dehradun Expressway से कनेक्ट होगा चारधाम
जानकारी के मुताबिक दिल्ली देहरादून एक्स्प्रेसवे में एक उप-मार्ग होगा जो हरिद्वार से जुड़ेगा और इसका मकसद है चारधाम हाईवे तक पहुंच को बेहतर बनाना ताकि तीर्थयात्रियों को आसानी हो। अगर उत्तराखंड के चारधाम के यात्रा की बात करें तो वह यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ है। बड़ी संख्या में लोग हर साल 4 धाम की यात्रा करते है। मालूम हो कि अभी हरिद्वार से ही श्रद्धालु केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री की यात्रा के लिए निकलते है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द इसपर डीपीआर तैयार कर सकती है। हालांकि अभी तक अधिकारिक तौर पर इसे लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मान जा रहा है कि एनएचएआई इसपर काम शुरू कर सकती है।
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे की खासियत जान रह जाएंगे दंग
दिल्ली से देहरादून जाने में अभी करीब 5 से 6 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने से इसकी दूरी केवल 2.5 से 3 घंटे की रह जाएगी। वहीं अगर खासियत की बात करें इस एक्सप्रेसवे को यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके साथ ही 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे बड़ा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है।
यानि जंगल के अंदर ऊपर गाड़ियों का संचालन होगा, तो वहीं नीचे से जंगली जानवरों की आवाजाही रहेगी। इमरजेंसी के समय तुरंत एंबुलेंस, डॉक्टरों की सुविधा मौजूद रहेगी। इसके साथ ही हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी जैसे पर्यटनों स्थलों पर जाने के लिए यह एक्सप्रेसवे गेमचेंजर साबित होने जा रहा है।
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे सिर्फ एक रोड नहीं, बल्कि टाइम और ट्रैवल को नया आयाम देने वाला प्रोजेक्ट है। यह पर्यावरण, सेफ्टी, हाई-स्पीड और आर्थिक विकास तीनों के लिए एक वरदान साबित होने जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इसका और विस्तार होगा।
