Gold Silver Crash: वैश्विक स्तर पर मची उठा-पटक के बीच सोना-चांदी की कीमतों में अस्थिरता देखने को मिली है। लगातार तीसरे दिन आज सोना-चांदी की चमक फीकी हुई है। यहां चमक फीकी होने का आशय कीमतों में हुई कमी से है। दरअसल, आज भी सोना और चांदी जैसी वस्तुओं की कीमत घटी है।
MCX पर चांदी जहां आज 10000 प्रति किग्रा तक सस्ती हुई, वहीं सोने के भाव में भी 4000 रुपए प्रति दस ग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई है। देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सोना-चांदी की कीमतों में लगातार जारी उठा-पटक को लेकर विशेषज्ञ अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का स्पष्ट कारण बताया है जिसके बारे में हम आपको बताएंगे।
विशेषज्ञों के हवाले से Gold Silver Crash का कारण
सोना और चांदी जैसे धातुओं की कीमत आसमान छूने के बाद आज लगातार तीसरे दिन गिरी है। देश के केन्द्र नई दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 162675 रुपए प्रति दस ग्राम के भाव से उपलब्ध है। चांदी भी भारी गिरावट के साथ 265652 रुपए प्रति किग्रा के भाव पर बाजार में बरकरार है। गोल्ड-सिल्वर क्रैश का प्रमुख कारण विशेषज्ञों द्वारा वैश्विक अस्थिरता को बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों की मानें तो निवेशक रिकॉर्ड स्तरों पर कीमत पहुंचने के बाद मुनाफा निकालना शुरू कर चुके हैं। इससे बिकवाली औचक बढ़ गई है। इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। इससे इतर वैश्विक बाजार की अस्थिरता भी सोना-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही है और धातुओं के दाम गिर रहे हैं।
क्या आगे भी सस्ती हो सकती है सोना-चांदी?
आगे सोना-चांदी की कीमत का रुख क्या होगा इसको लेकर सबके मन में अलग-अलग सवाल हैं। निवेशक से लेकर आम लोग तक सोना-चांदी की कीमतों को लेकर सजग हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक अस्थिरता के बीच इस सवाल का स्पष्ट रूप से कुछ जवाब नहीं दिया जा सकता। अमेरिका द्वारा कभी वेनेजुएला, तो कभी ग्रीसलैंड और कनाडा जैसे देशों को चेतावनी देना अस्थिरता का दौर ला रहा है।
इससे इतर विश्व में युद्ध जैसे हालात हैं। रूस-यूक्रेन के बाद अमेरिका-ईरान अब आमने-सामने खड़ा है। ये वैश्विक परिदृश्य को बदल रहे हैं। यही वजह है कि निवेशक भरोसा नहीं बरकरार रख पा रहे हैं। इसके कारण कभी बिकवाली बढ़ रही है, तो कभी धातुओं में निवेश रफ्तार पकड़ रहा है। ऐसे में आगे सोना-चांदी की कीमतों का रुख क्या होगा ये अंतरराष्ट्रीय बाजार और आने वाले आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगा।
