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Income Tax News: ITR फाइल करने की डेडलाइन से चूक गए? जानें देरी को माफ कराने का क्या है प्रोसेस

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Income Tax News
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Income Tax News: अगर आप एक करदाता है तो जानते होंगे कि इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) करदाताओं को टैक्स भरने के कई मौके देता है। ऐसे में अगर ई-वेरिफिकेशन या फिर इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में 31 दिसंबर 2023 से ज्यादा का समय हो गया है तो आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस खबर में जानिए क्या है इनकम टैक्स खबर ( Income Tax News)। दरअसल करदाता के पास अभी भी एक मौका है। करदाता देरी की माफी के लिए उचित अनुरोध कर सकते हैं। आगे देखिए क्या है इसका प्रोसेस।

Income Tax News: जुर्माना शुल्क से बच सकते हैं करदाता

आमतौर पर अगर कोई करदाता अपनी ई-वेरिफिकेशन से चूक जाता है तो उस पर आयकर विभाग जुर्माना लगाता है। मगर देरी की माफी के लिए अनुरोध कर सकते हैं। ऐसे में करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर माफी अनुरोध जमा करने पर जुर्माना शुल्क का भुगतान करने से बच सकते हैं।

ITR दाखिल करने में देरी को माफ कराने का प्रोसेस

आईटीआर दाखिल करने में देरी को माफ करने के करदाता को इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा। देखिए क्या है डिटेल-

  • सबसे पहले इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं। यहां आप अपने खाते तक पहुंचने के लिए लॉग इन कर सकते हैं।
  • लॉग इन करने के बाद आप पेज के शीर्ष रिबन पर सेवाओं पर जा सकते हैं। स्क्रॉल डाउन मेनू में देरी की माफी का अनुरोध अंतिम विकल्प दिया गया है।
  • इसके बाद आपको ‘माफी अनुरोध’ पर क्लिक करना है और माफी अनुरोध के प्रकार का चयन करें, जिसके साथ आप आगे बढ़ना चाहते हैं। फिर आप ‘आईटीआर-वी जमा करने में देरी’ पर क्लिक कर सकते हैं।
  • इसके बाद सिस्टम देरी का अनुरोध बनाने का विकल्प देता है। यह तीन चरणों वाली प्रक्रिया है।
  • यहां पर आपको पहले स्टेप में आईटीआर को सेलेक्ट करना है, दूसरे स्टेप में आपको देरी का कारण बताना होगा और अंतिम स्टेप में देरी को माफ करने का अनुरोध सबमिट करना होगा।

ITR में देरी को माफ करने के लिए क्या जरूरत है, देखिए Income Tax News

यहां पर आपको बता दें कि आईटीआर फाइल करने की देरी की माफी की प्रक्रिया के लिए आपको इन शर्तों को पूरा करना होगा।

  • इसमें पहली शर्त है कि करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल का रजिस्टर्ड सदस्य होना चाहिए।
  • करदाता का पैन बैंक खाते से जुड़ा होना चाहिए।
  • इसके अलावा यह भी जरूरी है कि करदाता का बैंक खाता मान्य हो और ई-वेरिफिकेशन इनेबल हो।
  • अंत में जब करदाता अनुरोध जमा कर देते हैं तो आयकर विभाग अनुरोध को मंजूरी दे देता है, जिसके बाद करदाता इनकम टैक्स रिटर्न जमा कर सकता है।

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