Retail Inflation: मीडिल ईस्ट में युद्ध लगातार जारी है। एक तरफ यूएस और इजरायाल ईरान पर लगातार हमला कर रहे है, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान भी मुहतोड़ जवाब दे रहा है। युद्ध शुरू हुए 10 दिन से ज्यादा हो चुके है, लेकिन अभी भी एक दूसरे पर मिसाइल दागी जा रही है। गौरतलब है कि अब इसका असर दिखना शुरू हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी, इसके अलावा ईरान होमुर्ज जलडमरूमध्य से आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है। यानि तेल के जहाज एक जगह पर रूक चुके है। इसी बीच अब भारत को एक और तगड़ा झटका लगा है। खुदरा महंगाई दर में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
Retail Inflation में जोरदार बढ़ोतरी
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 3.21% हो गई, जो जनवरी में 2.75% थी। फरवरी 2026 महीने के लिए आवास मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 2.12% (अस्थायी) है और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संबंधित मुद्रास्फीति दरें क्रमशः 2.43% और 2.00% हैं।
जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संगठन (एनएसओ), स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा संस्थान (एमओएसपीआई) के फील्ड ऑपरेशंस डिवीजन के फील्ड स्टाफ द्वारा साप्ताहिक आधार पर व्यक्तिगत दौरों के माध्यम से चयनित 1407 शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजारों सहित) और 1465 गांवों से वास्तविक समय मूल्य डेटा एकत्र किया जाता है।
फरवरी 2026 के महीने के दौरान, 100% ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य एकत्र किए गए, जबकि रिपोर्ट किए गए बाजारवार मूल्य ग्रामीण बाजारों के लिए 99.89% और शहरी बाजारों के लिए 99.78% थे।
बढ़ती महंगाई से क्या भारत की अर्थव्यवस्था को होगा नुकसान
माना जा रहा है कि अगर युद्ध ज्यादा दिन तक चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में धीमी पड़ सकती है। गौरतलब है कि धीरे-धीरे इसके असर दिखना शुरू हो चुका है। खुदरा महंगाई दर में तेज आई है। माना जा रहा है कि मार्च की खुदरा महंगाई दर में और उछाल देखा जा सकता है। जिसकी रिपोर्ट 13 अप्रैल 2026 को जारी की जाएगी।
पोर्टल पर उपलब्ध राज्य-स्तरीय वस्तु सूचकांकों की व्याख्या सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में सूचकांक संकलन के लिए उपयोग किए गए मूल्य के नमूने सीमित हैं।
इसके साथ ही आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय लेते समय खुदरा मुद्रास्फीति पर कड़ी नजर रखता है। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य मुद्रास्फीति को 4% पर बनाए रखना है, जिसमें 2-6% की सहनशीलता सीमा है।






