UPI Payment: देशभर के करोड़ों यूपीआई यूजर्स को केंद्र सरकार ने विशेष तोहफा दिया है। बता दें कि बीते कई दिनों से खबरें सामने आ रही थी कि यूपीआई पेमेंट से होने वाले ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगेगा, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे लेकर सबकुछ साफ कर दिया है। नए नोटिफिकेशन के मुताबिक 2000 रूपये के ट्रांजैक्शन तक किसी भी प्रकार का चार्ज नहीं देना होगा।
बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से बीते दिन यानि सोमवार को भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन अधिसूचित किया गया। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी
UPI Payment पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक “पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (2007 का 51) की धारा 10A के तहत, केंद्र सरकार बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को
As per section 10A of the Payment and Settlement Systems Act, 2007 (51 of 2007), the Central Government prohibits banks and system providers from imposing, directly or indirectly, any charges on a person making or receiving payments using debit cards powered by RuPay and UPI… pic.twitter.com/PjND7CJepA
— ANI (@ANI) September 14, 2026
RuPay-पावर्ड डेबिट कार्ड और 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांज़ैक्शन का इस्तेमाल करके पेमेंट करने या लेने वाले व्यक्ति पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी चार्ज लगाने से रोकती है”।
हालांकि, सरकार ने यह साफ़ नहीं किया है कि क्या 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट को कोई चार्ज देना होगा। अब तक UPI ट्रांज़ैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगता रहा है, चाहे रकम कितनी भी हो।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है। सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी।
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 15, 2026
लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं”।
