Anurag Dhanda: मुखरता के साथ अपना पक्ष रखने वाले वरिष्ठ नेता ने एक बार फिर तल्ख प्रतिक्रिया दी है। पूरा मामला जस्टिस स्वर्ण कांता को दिल्ली शराब नीति केस से हटाने से जुड़ी याचिका के खारिज होने से जुड़ा है। अनुराग ढ़ांडा ने मीडिया से बात करते हुए मुखरता के साथ अपने पक्ष रखे हैं। आप नेता ने कुछ सवालों के साथ स्पष्ट किया है कि कैसे जस्टिस स्वर्ण कांता और अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले में टकराव आ सकती है। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने मजबूती से तर्क रखे हैं। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता के आरएसएस के कार्यक्रमों में जाने और कुछ पहलुओं का जिक्र किया है।
जस्टिस स्वर्ण कांता से जुड़े मामले पर Anurag Dhanda के तल्ख रुख!
आप नेता ने मुखरता के साथ जस्टिस स्वर्ण कांता से जुड़े मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है।
#WATCH | Rohtak, Haryana | On Delhi HC dismissing Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, and others’ plea seeking recusal of Justice Swarana Kanta Sharma in the excise policy case, AAP leader Anurag Dhandha says, “… When Justice Swarn Kanta delivered her verdict yesterday, Arvind… pic.twitter.com/h1sUYpzPgM
— ANI (@ANI) April 21, 2026
अनुराग ढ़ांडा ने कहा है कि कल जब न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता ने अपना फैसला सुनाया, तो अरविंद केजरीवाल ने दो महत्वपूर्ण बातें उठाईं। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं। उन्हें वहीं से मामले मिलते हैं और वहीं से उन्हें वेतन मिलता है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता ने अपने फैसले में इस बात का खंडन या खंडन नहीं किया। न्यायाधीशों के बच्चे वकील हो सकते हैं, लेकिन अगर वे केंद्र सरकार के वकील हैं, तो हितों का टकराव होना तय है।
मुखरता से अपना पक्ष रखते हुए अनुराग ढ़ांडा ने कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता नियमित रूप से आरएसएस के कार्यक्रमों और उसके सहयोगी संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद में भाग लेती हैं। उन्होंने इस बात का खंडन या खंडन नहीं किया। आरएसएस खुले तौर पर एक राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करता है। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के सदस्य भी खुले तौर पर एक राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करते हैं।
दोनों का जिक्र कर अनुराग ढ़ांडा ने कहा कि दो स्पष्ट संदेह बने हुए हैं। क्या न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ निष्पक्ष फैसला दे पाएंगी, यह देखते हुए कि उनके दोनों बच्चे पैनल में हैं। वह केंद्र सरकार के पैनल की सदस्य हैं और नियमित रूप से आरएसएस और अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में भाग लेती हैं? आप नेता के इस सवालिया अंदाज की खूब चर्चा हो रही है।
दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त रुख के बाद छिड़ा घमासान!
पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने मजबूत तर्कों के साथ दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता को केस से हटाने के लिए याचिका दाखिल की थी। दिल्ली हाईकोर्ट में ये याचिका खारिज हो गई। मामले की खुद ही सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अपना पक्ष रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद घमासान का दौर छिड़ा है। अरविंद केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, अनुराग ढ़ांडा समेत तमाम नेता मुखरता से अपना पक्ष रखते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सवाल रख रहे हैं।
