CJP Protest: नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में विसंगतियों के खिलाफ हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन,केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों के बढ़ते दबाव के बीच, उन्होंने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। जो जेन-जी के गुस्से और संगठित छात्र शक्ति की एक बड़ी जीत के तौर पर उभरा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले करीब 36 दिनों तक चला यह छात्र आंदोलन भारतीय राजनीति में एक नया आयाम स्थापित किया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
पिछले एक दशक से स्थापित इस धारणा को युवाओं ने आखिरकार तोड़ दिया कि ” सरकार के मंत्री जन-आंदोलनों के आगे झुककर इस्तीफे नहीं देती”। अब सत्ता में बैठे राजनेताओं को जनता और छात्रों के प्रति अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। हालांकि, केन्द्र की मोदी सरकार ने पूरी जिम्मेदारी के साथ छात्रों के हक में बात करते हुए फैसले लिए हैं, जो बहुत तारीफ़ के काबिल हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से अपने त्यागपत्र में स्वयं स्वीकार किया कि देश की युवा शक्ति ही असली ताकत है। ऐसे में यह साबित करता है कि जब बात देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और परीक्षाओं की पारदर्शिता की हो, तो सत्तारूढ़ सरकार को नैतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा।
विपक्ष को सीखने की जरुरत
मालूम हो कि विपक्ष अक्सर विभिन्न मुद्दों के साथ सदन से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की कोशिश करता है, लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले करीब 36 दिनों तक चला छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अभिजीत दिपके (सीजेपी प्रमुख) और प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की कार्यशैली से विपक्षी राजनीतिक दलों को कई महत्वपूर्ण सीख सीखने को मिलती हैं।
इस छात्र आंदोलन में यह देखने को मिला कि सोनम वांगचुक, सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके समेत ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के अन्य छात्र और युवाओं ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए अंत तक सरकार के शीर्ष मंत्रियों (जैसे जे.पी. नड्डा) के साथ कड़े लेकिन सकारात्मक संवाद का रास्ता खुला रखा। इसका परिणाम आज देश के सामने हैं। इसमें बिना किसी हिंसक टकराव के, देश की एकता और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक ठोस नतीजा सामने देखने को मिला है। जो विपक्ष के लिए बड़ी सीख है।
