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Coal Crisis: देश में कोयला संकट! स्टील उद्योग से लेकर इन उद्योगों को होगी परेशानी

आने वाले वक्त में देश में बिजली संकट की आशंका जताई जा रही है। इसके पीछे की वजह है कोयला का खत्म हो जाना। ऐसे में जो भी इंडस्ट्री बिजली पर निर्भर रहती है उसे मुश्किलों का सामना करना। स्टील से लेकर ऑयल रिफायनरी तक के कई बड़े उद्योगों को मुश्किल के दौर से गुजरना पड़ेगा।

जैसा कि हम सबको पता है कि कोयला भारत में प्रमुख इंधन है।करीब 70 पीस भी बिजली का उत्पादन कोयले से ही होता है और इस वक्त देश में भीषण कोयला संकट जारी है। देश में 135 पावर प्लांट ऐसे है, जहां कोयले से बिजली बनाई जाती है और सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि इनमें से 18 प्लांट में कोयला पूरा खत्म हो चुका है, यानी यहां कोयले का स्टॉक ही नहीं है।

ऐसे में अंदेशा जताई जा रही है कि वह दिन दूर नहीं होगा जब देश अंधकार में डूब जाएगा।हालांकि केंद्र सरकार लगातार दावा कर रही है कि देश में कोई भी कोयला संकट नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में कोयला संकट की बात को निराधार बताया।

अगर देश में बिजली ठप हो जाती है तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो सकता है। जो कि अभी बड़ी मुश्किलों से करो ना संकट से उबरा था। आयातित कोयले की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसकी वजह से लोहा, स्टील, एल्युमिनियम जैसे कमोडिटी का उत्पादन लागत काफी बढ़ गया है और इनके उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है।

बड़े स्टील उत्पादकों के पास अपने कैप्ट‍िव पावर प्लांट हैं, इसलिए अभी उनको किसी बिजली संकट का सामना नहीं करना पड़ रहा। लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर कोयले की मौजूदा तंगी को दूर नहीं किया गया तो अगले दो महीने में उनकी भी हालत खराब हो सकती है।

कोयले की कमी की वजह से गैस की मांग बढ़ेगी या नहीं रिफाइनरी के लिए डिमांड काफी बढ़ सकती है इस चीज की तरह ही भारत में बड़े तेल रिफाइनरी के पास अपना कैपटिव प्लांट है इसलिए कोयले की कमी का उन पर असर नहीं होगा लेकिन उन्हें मांग पूरी करने के लिए एलएनजी का आयात बढ़ाना होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दिनों एलएनजी काफी महंगा चल रहा है इस तरह कोयला संकट का असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है।

इसके अलावा ईंट के भट्टों पर भी इसका बेहद खतरनाक असर पड़ेगा। क्योंकि देश में ज्यादातर ईट भट्टों में ईंधन के रूप में आयातित कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयला कीमतों में तेजी आने से ईंट भट्टों को घरेलू कोयले पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इसमें देश में कोयला आपूर्ति पर दबाव और बढ़ेगा।

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