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कोयला संकट: भारत ही नहीं पूरे एशिया पर पड़ा रहा कोयला संकट का असर, जानें भारत के ताजा हाल

ऊर्जा की कमी से अकेले चीन और भारत ही नहीं बल्कि पूरा एशिया जूझ रहा है। जिससे निकलने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

ऊर्जा की कमी से अकेले चीन और भारत ही नहीं बल्कि पूरा एशिया जूझ रहा है। जिससे निकलने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। भारत के अधिकांश कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों में ऐसे समय में कोयले का स्तर बहुत कम है। अब जब देश कोरोना महामारी से उबरने के बाद अर्थव्यवस्था में भी तेजी आ रही है और बिजली की मांग बढ़ रही है। ऐसे समय में बिजली का संकट गहराता जा रहा है। भारत की कोयला स्थिति के बारे में बात करें तो भारत के बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी लगभग 70% है।

नाभिकीय ऊर्जा पर जोर


कोयले से बिजली बनाने में भारत दुनिया में छठे स्थान पर है। चीन बिजली संकट से उबरने के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोत पर जोर दे रहा है लेकिन वह भी बिजली आपूर्ति के लिए बहुत हद तक कोयले पर ही निर्भर है। अब कहा जा रहा है कि भारत और चीन दोनों ही देश नाभिकीय ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा पर फोकस कर रहे हैं और दोनों ही इन क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। ताजा सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि 6 अक्टूबर तक, भारत के 135 कोयला-संचालित संयंत्रों में से 80% के पास 8 दिनों से भी कम की आपूर्ति शेष थी उनमें से आधे से अधिक के पास दो दिन या उससे कम का स्टॉक था।

कोल इंडिया लिमिटेड के 19,9000 करोड़ रुपये बकाया


वहीं दूसरी तरफ पंजाब, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कम से कम 10 राज्यों में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का बकाया 19,9000 करोड़ रुपये है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मानसून में देरी और फिर एक विस्तारित बारिश कुछ ऐसे कारक थे जिन्होंने देश में कोयले की आपूर्ति को प्रभावित किया। बकाया देय राशि और इस तथ्य के बावजूद कि इन राज्यों द्वारा कोयले का सेवन नियमित किया जा रहा था, सीआईएल ने इन राज्यों को आपूर्ति बनाए रखी है।केंद्र की ओर से कई बार याद दिलाने के बावजूद राज्य सरकारों ने अपने कोयले का स्टॉक नहीं बढ़ाया।  आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक कोयला मंत्रालय की ओर से इस साल जनवरी, अप्रैल और मई में राज्यों को इस बारे में एक सूचना दी गई थी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह द्वारा राज्यों को एक पत्र भी लिखा गया था।

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पूरी तरह कोयले पर निर्भर देश


बोत्सवाना एक ऐसा देश है जो बिजली उत्पादन के लिए पूरी तरीके से कोयले पर भी निर्भर है।इस दक्षिण अफ्रीकी देश में करीब-करीब संपूर्ण बिजली उत्पादन कोयले से ही होता है। वहीं बाल्कन रिपब्लिक देश कोसोवा में 95 फीसद बिजली उत्पादन कोल प्लांट से होता है।

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