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Karnataka Politics में क्या बीजेपी नेताओं को निशाना बनाने के लिए आया हेट स्पीच बिल? विरोध के बीच जानें सीएम सिद्धारमैया के मंत्री का पक्ष

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Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Karnataka Politics: बेंगलुरु में विधानसभा के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही के दौरान जारी हो-हल्ला के बीच एक खास बिल पेश हुआ है। इसे हेट स्पीच बिल नाम दिया गया है जिसको लेकर सियासी संग्राम का दौर जारी है। बीजेपी इस बिल का मुखरता के साथ विरोध कर रही है। कर्नाटक पॉलिटिक्स में विपक्ष की भूमिका निभा रही भाजपा का तर्क है कि सिद्धारमैया सरकार बीजेपी नेताओं को निशाना बनाने के लिए हेट स्पीच बिल लेकर आई है। इस विरोध के बीच मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री जी परमेश्वर ने अपना पक्ष रखा है। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर का कहना है कि यह कानून भाजपा या उसके नेताओं को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि राज्य में भड़काऊ बयान पर नियंत्रण के लिए है।

क्या बीजेपी नेताओं को निशाना बनाने के लिए आया हेट स्पीच बिल? – Karnataka Politics

कर्नाटक सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस संदर्भ में जवाब सामने आया है। राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने साफ तौर पर कहा है कि हेट स्पीच बिल का लक्ष्य कर्नाटक में भड़काऊ बयानबाजी पर नियंत्रण लगाना है। राज्य सरकार इस बिल की मदद से किसी भी दल विशेष के नेताओं को निशाना नहीं बनाएगी। सीएम सिद्धारमैया के करीबी मंत्री जी परमेश्वर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए हेट स्पीच बिल की खासियत पर प्रकाश डाला है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी इसको लेकर कहा है कि बिल का लक्ष्य राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, ताकि नफरत भरी भाषा पर पूर्ण रूप से रोक लग सके।

हेट स्पीच बिल को लेकर बीजेपी का तर्क!

बीजेपी अपने हिस्से का पक्ष रखते हुए कर्नाटक सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए हेट स्पीच बिल का विरोध कर रही है। कर्नाटक में विपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी का तर्क है कि कर्नाटक सरकार इस कानून के सहारे कानून हिंदुत्व संगठनों और तटीय कर्नाटक के संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय समूहों को निशाने पर लेगी। इसके अलावा बीजेपी आरोप लगा रही है कि यह बिल उन साम्प्रदायिक प्रतिशोध वाली हत्याओं के बाद लाया गया, जिन्होंने मंगलुरु क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था।

मालूम हो कि हेट स्पीच बिल के तहत सार्वजनिक रूप से मौखिक, मुद्रित, प्रकाशन, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या अन्य साधनों के माध्यम से ऐसे घृणास्पद बयान देने वालों को सजा दी जाएगी। इसके तहत दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को कम से कम एक वर्ष कारावास, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और उस पर 50000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माने और कारावास की अवधि अपराध दोहराने पर बढ़ भी सकती है। राज्य सरकार की मुखरता के बीच बीजेपी और जेडीएस इस बिल का खूब विरोध कर रही है।

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