Madhy pradesh: खरगोन का वो मंदिर जहां लगी है 5 हजार से भी ज्यादा घंटियां, जानिए घंटी वाले मंदिर की मान्यता

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Madhy pradesh: मंदिर में घंटी तो आपने बहुत देखी होगी लेकिन क्या आपको पता है कि एक मंदिर ऐसा भी है जहां घंटियों का अंबार है, उसे घंटी वाला मंदिर के नाम से जाना जाता है। ये मंदिर मध्यप्रदेश के खरगोन में स्थित है। यह शिवरी धाम के मोती बाबा का देवस्थान है। मंदिर परिसर में करीब 5000 से अधिक छोटी बड़ी घंटियों का ढेर लगा है। साथ बड़ी घंटी और चार बड़े घंटे लगे हैं। इनका वजन किलो में नहीं बल्कि क्विंटल में है। इस मंदिर में कोई भी पुजारी है चौकीदार नहीं है, फिर भी यहां से कभी एक भी घंटी चोरी नहीं हुई।

आपको बता दें कि भीकनगांव से 10 किलोमीटर पोखर बुजुर्ग में देवरी धाम के नाम से शेष अवतार नाग देवता का यह मंदिर है, इस मंदिर में भाद्रपद की चतुर्दशी पर सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में लगे पवित्र पीपल और गुल्लर पर जाति के पेड़ की परिक्रमा भी करते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु हलवा प्रसादी बनाकर ग्रहण कर घंटी बांधते हैं। खास बात यह है कि हलवा प्रसादी भक्तों को यहीं खानी होती है। वह इसे साथ में नहीं ले जा सकते हैं। सुबह से मंदिर में पूजन अभिषेक के साथ भक्त ही देसी घी से हलवा प्रसादी तैयार करते हैं।

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देवरी धाम पोखर बुजुर्ग में दर्शन पूजन कर श्रद्धालु यहां पीतल की घंटियां चढ़ाते हैं बताते हैं कि मोती बाबा नागलवाड़ी के प्रसिद्ध भिलट देव के वंशज हैं बाबा हरदा जिले के अंजनी बामणी गांव से आए थे बुजुर्ग बताते हैं कि इस स्थान पर सेवरी घास बहुत मात्रा में लगती है इस कारण मोती बाबा को सेवरी देव भी कहा जाता है।

मोती बाबा नागलवाड़ी के प्रसिद्ध भीलट देव के हैं। वंशज
सेवरीधाम पोखर बुजुर्ग में दर्शन-पूजन कर श्रद्धालु यहां पीतल की घंटियां चढ़ाते हैं। बताते हैं कि मोती बाबा नागलवाड़ी के प्रसिद्ध भीलट देव के वंशज हैं। बाबा हरदा जिले के ‘अंजनी बमणी’ गांव से आए थे। बुजुर्ग बताते हैं कि इस स्थान पर सेवरी घास बहुत मात्रा में लगती है। इस कारण मोती बाबा को सेवरी देव भी कहा जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ जहां किसानों के खेतों से मोटर और केबल चोरी हो जाती है, वहीं खेतों के बीच इस देवस्थान पर हजारों पीतल की घंटियां और बड़े-बड़े घंटों सहित अन्य सामान पड़ा रहता है, लेकिन अब तक यहां चोरी नहीं हुई।

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अनोखा है मंदिर के शिखर का निर्माण

मंदिर के शिखर का निर्माण भी अनोखे ढंग से किया गया है 61 फीट ऊंचे शिखर से होकर स्वीपर पेड़ की शाखाएं निकलती है। इस शिखर के निर्माण के लिए पेड़ की एक भी 1 को नहीं काटा गया है पेड़ के मूल में मोती बाबा की प्रतिमा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान के प्रति लोगों में गहरी आस्था है मंदिर में घंटी चढ़ाने का काम भी बरसों से चल रहा है। ग्रामीण यह भी बताते हैं कि जीरे का पानी केन्या बर्तन में भरकर लोग साथ ले जाते हैं यह जल भरा बर्तन कितना ही दूर क्यों ना ले जाना हो जमीन पर नहीं रखा जाता है इसे संभाल कर पूजा घर में खूंटी पर टांगते हैं।

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