तीर्थ पर्यटन के साथ रोजगार के अवसरों का सृजन कर रही Mohan Yadav सरकार! 1450 किमी लंबा श्रीराम वन गमन पथ MP को देगी नई दिशा

मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार राज्य में तीर्थ पर्यटन को गति देने का काम कर रही है। इसी क्रम में 20 सांस्कृतिक व धार्मिक लोकों का निर्माण कार्य जारी है। आने वाले समय में इससे तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा।

Mohan Yadav

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Mohan Yadav: मध्य प्रदेश में संभावनाओं के द्वार खोल रही राज्य सरकार जनहित से जुड़ी नीतियों के तहत सूबे की तस्वीर बदल रही है। इसी क्रम में तीर्थ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम मोहन यादव के निर्देशानुसार 900 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के साथ 20 सांस्कृतिक व धार्मिक लोकों का निर्माण प्रगति पर है। सीएम मोहन यादव की सरकार 1450 किमी लंबे श्रीराम वन गमन पथ का निर्माण भी तेजी से करा रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य सूबे में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साथ तीर्थ पर्यटन को गति देने और रोजगार सृजन का है।

तीर्थ पर्यटन को गति देकर अवसरों के द्वार खोल रही Mohan Yadav सरकार!

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में तीर्थ पर्यटन को गति देने के साथ अवसरों के द्वार खोल रही है। इस क्रम में कई विकास कार्यों को गति दी जा रही है।

वर्तमान की बात करें को सीएम मोहन यादव के निर्देशानुसार 20 सांस्कृतिक व धार्मिक लोकों का निर्माण प्रगति पर है। इसकी लागत 900 करोड़ रुपए से अधिक है। इसमें संत रविदास लोक, देवी लोक, श्री रामराजा लोक, भगवान परशुराम लोक, भगवान पशुपतिनाथ लोक समेत अन्य तीर्थ पर्यटन शामिल हैं। इसकी मदद से आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक जड़ों को जीवंत रखा जा सकेगा। सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे ये सांस्कृतिक लोक तीर्थ पर्यटन का हिस्सा हैं जो आने वाले समय में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन करने में भूमिका निभाएंगे।

1450 किमी लंबा श्रीराम वन गमन पथ MP को देगी नई दिशा!

मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देने के क्रम में 1450 किमी लंबे श्रीराम वन गमन पथ को अहम माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के 10 जिलों से गुजरने वाले राम वन गमन पथ चित्रकूट से शुरू होकर अमरकंटक तक फैलेगा। इस दौरान यह मार्ग सतना, पन्ना, कटनी, जबलपुर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों से गुजरेगा। इससे जहां एक ओर कनेक्टिविटी को गति मिलेगी। वहीं तीर्थ पर्यटन के विकास में भी चार-चांद लगेगा। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में इसे सूबे की विकास को नई दिशा देने वाली परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।

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