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दिवाली से पहले महाराष्ट्र सरकार का बड़ा तोहफा, कोरोना का इलाज करने वाले डॉक्टरों को मिलेंगे 1.21 लाख रुपये

कोरोना वायरस के संक्रमण से बीते करीब डेढ़ साल से भारत के कई राज्य पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। जिसमें महाराष्ट्र इस संक्रमण से सबसे ज्यादा जूझने वाला राज्य रहा है

कोरोना वायरस के संक्रमण से बीते करीब डेढ़ साल से भारत के कई राज्य पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। जिसमें महाराष्ट्र इस संक्रमण से सबसे ज्यादा जूझने वाला राज्य रहा है लेकिन इस महामारी के दौरान डॉक्टरों के योगदान को भूला नहीं जा सकता। जिस वक्त पूरी दुनिया इस महामारी के खौफ में घरों की खिड़की से झांक रहीं थी तब यही जांबाज डॉक्टर कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे थे। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने कोविड इलाज में लगे डॉक्टर को तोहफा दिया है। कोविड इलाज में लगे सरकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को उद्धव सरकार ने स्पेशल इंसेंटिव के तौर पर 1.21 लाख रुपये दिए जाने का फैसला किया है। दूसरी तरफ इस लिस्ट में मुंसिपल कॉरपोरेशन के डॉक्टर का नाम भी शामिल है।

महाराष्ट्र सरकार की बड़ी घोषणा

दरअसल महामारी के दौर में कोरोना की लहर का सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों पर पड़ा है। कोरोना संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र ऐसा राज्य था जो कोरोना संक्रमित दर के मामले में पहले नंबर पर था। हालांकि पहले के मुकाबले राज्य में कोरोना का रफ्तार में काफी कमी देखी गई हैं। इसके साथ ही मृत्यु दर का ग्राफ भी नीचे आया है।महाराष्ट्र सरकार की नई घोषणा के साथ प्रदेशभर में कार्य कर रहे हजारों डॉक्टरों को लाभ मिलेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों के सभी रेजिडेंट डाक्टरों को इस योजना का लाभ मिलेगा। जानकारी के मुताबिक दो किस्तों में यह राशि डॉक्टर को दी जाएगी।

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एमएआरडी ने फैसले का किया स्वागत

उद्धव सरकार के इस फैसले के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने खुशी जाहिर की है। वहीं सेंट्रल एमएआरडी के उपाध्यक्ष डॉ प्रणव जाधव ने कहा है कि सरकार के इस सराहनीय फैसले का हम स्वागत करते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले एमएआरडी इन मांगों को लेकर हड़ताल कर रहा था। जिसके बाद 2 अक्टूबर को इन मामलों को लेकर हड़ताल शुरू की गई थी। हड़ताल के दो दिन बाद उद्धव सरकार ने संज्ञान लेते हुए पूरे मामले पर बैठक की थी। जानकारी के मुताबिक सीएम उद्धव ठाकरे ने इनके साथ बैठक की और मांगों पर सुझाव करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद हड़ताल को खत्म कर दिया गया था। एमएआरडी ने हड़ताल करते समय उद्धव सरकार के सामने तीन मांगें रखी थी  जिसमे महामारी के दौरान शैक्षणिक शुल्क की छूट भी शामिल थी।

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