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Covid Second Wave: संसदीय समिति ने कोविड की दूसरी लहर में सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल, कही ये बातें

समिति ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर बड़ी संख्या में मामलों, मौतें, अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और जरूरी दवाओं की कमी, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने, ऑक्सीजन सिलिंडरों व दवाओं की कालाबाजारी और जमाखोरी जैसे हालात लेकर आई। इसके बावजूद सरकार कोरोना वायरस के नये स्वरूप की संक्रामकता व घातक असर को नहीं पहचान सकी। अगर महामारी को रोकने के उचित रणनीतिक कदम उठाए गए होते तो परिणाम इतने भयानक नहीं होते।

Parliamentary Committee On Covid Second Wave: दिल्ली से बड़ी ख़बर सामने आई है। ख़बर कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान गई कई जानें से जुड़ी हुई है। इस पर अब स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को जो बातें कही है, उससे जानना आज हम सबको बहुत ही जरुरी है। स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान ‘‘ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौत’’ के मामलों की राज्यों के समन्वय से लेखा-परीक्षा करने की सिफारिश की है, ताकि मृत्यु के मामलों का उचित दस्तावेजीकरण किया जा सके।

बताते चलें कि इसके अलावा समिति ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर बड़ी संख्या में मामलों, मौतें, अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और जरूरी दवाओं की कमी, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने, ऑक्सीजन सिलिंडरों व दवाओं की कालाबाजारी और जमाखोरी जैसे हालात लेकर आई। इसके बावजूद सरकार कोरोना वायरस के नये स्वरूप की संक्रामकता व घातक असर को नहीं पहचान सकी। अगर महामारी को रोकने के उचित रणनीतिक कदम उठाए गए होते तो परिणाम इतने भयानक नहीं होते। साथ ही समिति ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार को पहली लहर के बाद जब मौतों की संख्या घटने लगी थी तभी से कड़ी निगरानी जारी रखनी चाहिए थी।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बातों को राज्य ने नजरअंदाज किया

आपको बता दें कि स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि हम इस बात से नाखुश है कि कई राज्य दूसरी लहर के दौरान उत्पन्न हुईं अनिश्चितताओं और आपात स्वास्थ्य स्थितियों से निपटने में असमर्थ रहे, जिसके चलते पांच लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके अलावा समिति ने कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को कोविड की निगरानी और आपात हालात के लिए स्थानीय रणनीति बनाने को कहा था। इसके बाद भी राज्य इस दिशा में कार्य करने में अक्षम साबित हुए। इसे देखते हुए यह भी वजह है कि महामारी की दूसरी लहर में पांच लाख से ज्यादा लोगों की जानें गई।

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