CM Yogi Adityanath: भारत वर्तमान में अपनी नैचुरल गैस की जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है। हाल की भू-राजनीतिक घटनाओं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई रुकावटों ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया है।
इस जलमार्ग से भारत के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) आयात का लगभग 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा आता है। इसी को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 अगस्त 2026 को कुल 23,731 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘गोबरधन’ (राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना) को मंज़ूरी दी। जिसपर उत्तर प्रदेश के CM Yogi Adityanath ने केंद्र सरकार का आभार प्रकट किया है।
गोबरधन योजना पर CM Yogi Adityanath ने जताया आभार
उत्तर प्रदेश के CM Yogi Adityanath ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा आज ₹23,731 करोड़ की लागत से गोबरधन (GOBARdhan) योजना को स्वीकृति दिया जाना आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के यशस्वी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा आज ₹23,731 करोड़ की लागत से गोबरधन (GOBARdhan) योजना को स्वीकृति दिया जाना आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने,…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 6, 2026
यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने, जैविक अपशिष्ट को ‘वेस्ट टू वेल्थ’ में बदलने के साथ ही निवेश को गति देने तथा देश की ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस दूरदर्शी, पर्यावरण हितैषी एवं जनकल्याणकारी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार।
किसानों और ग्रामीण इलाकों को क्या फायदा होगा?
इस योजना का सीधा असर उन इलाकों पर पड़ सकता है जहां कृषि अवशेष और पशुओं का गोबर बड़ी मात्रा में उपलब्ध होता है. इन चीजों को बेकार छोड़ने के बजाय बायोगैस और जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की आय बढ़ाने के साथ कचरे का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।
यानी खेत और गांव से निकलने वाली जैविक सामग्री सिर्फ कचरा नहीं रहेगी, बल्कि उससे आर्थिक फायदा लेने का रास्ता बनेगा। माना जा रहा है कि ये कई मायनों में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। इसके साथ ही इस योजना के शुरू होने से विदेशी निर्भरता भी कम होने की उम्मीद है।
