CM Yogi Adityanath: सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया तक में नक्सल विचारधार खूब सुर्खियां बटोर रहा है। चर्चित नक्सल कमांडर हिडमा के मारे जाने के बाद राजधानी में नारेबाजी भी इसकी प्रमुख वजह है। इससे इतर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी नक्सल नेक्सस का भंडाफोड़ करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। सीएम योगी ने कहा है कि हिंसक विचारधाराओं के हिमायतियों के प्रति कांग्रेस का अंध समर्थन उसके नक्सल समर्थक नजरिए का क्रूर सच है। ऐसे में जब सीएम योगी आदित्यनाथ नक्सली विचारधारा का जिक्र कर रहे हैं, तो कईयों के मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि ये होता क्या है? आइए हम इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के साथ मुख्यमंत्री योगी की प्रतिक्रिया के बारे में बताते हैं।
नक्सल नेक्सस का जिक्र कर कांग्रेस पर हमलावर हुए CM Yogi Adityanath
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक्स हैंडल से पोस्ट जारी कर नक्सली नेक्सस का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला गया है।
सीएम योगी के एक्स हैंडल से लिखा गया है कि “अलगाववाद, अराजकता और हिंसा की प्रतीक नक्सली विचारधारा को कांग्रेस पार्टी की विखंडित-विभाजनकारी दृष्टि ने सदैव बढ़ावा दिया है।राजनीतिक लाभ के लालच में कांग्रेस ने नक्सली नेटवर्क को नैतिक संरक्षण और उनके समर्थकों को राजनीतिक सहारा देकर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया। यूपीए काल में नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) की नीतिगत नौटंकी ने सुरक्षा-बलों के साहसिक अभियानों को कमजोर कर देश की सुरक्षा-रेखा को ही संकट में झोंक दिया।”
पीएम मोदी का जिक्र करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ लिखते हैं कि “प्रधानमंत्री सही कहते हैं कि कांग्रेस, मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस’बन चुकी है, जहां विचार नहीं, वोट निर्णायक हो गए हैं। बिनायक सेन से नवलखा-वरवर राव तक हिंसक विचारधाराओं के हिमायतियों के प्रति कांग्रेस का अंध समर्थन उसके नक्सल समर्थक नजरिए का क्रूर सच है। कांग्रेस नक्सल नेक्सस लोकतंत्र के ललाट पर काला धब्बा, राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा प्रहार है, देश अब यह हकीकत जान चुका है।” यूपी सीएम की ये प्रतिक्रिया अब खूब सुर्खियां बटोर रही है।
क्या होती है नक्सली विचारधारा?
तमाम लोगों के मन में इस सवाल को लेकर तमाम तरह के जवाब उपज सकते हैं। सामान्यत: बात करें तो नक्सली विचारधारा आदिवासियों के बीच लोकप्रिय रही है। इसका एक लंबा अतीत है जो पढ़ने पर चीजें और स्पष्ट हो सकेंगी। आम तौर पर नक्सलियों का मानना होता है कि मजदूरों और भूस्वामियों के बीच वर्ग संघर्ष है और भारतीय संविधान में आदिवासी श्रमिकों के लिए सुरक्षा का अभाव है। इसी विचारधारा को लिए नक्सली भारत की एकता-अखंडता को चोट पहुंचाने की जुर्रत करते हैं। हालांकि, वर्तमान सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर झारखंड तक के आदिवासी बहुल इलाकों में पाए जाने वाले नक्सलियों को गहरा चोट देते हुए उन्हें खत्म किया है।
