Jaya Ekadashi 2026: जनवरी का अंतिम सप्ताह बीतने को है। इसी बीच सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले लोगों को जया एकादशी का बेसब्री से इंतजार है। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी कहते हैं जो इस वर्ष 29 जनवरी को पड़ी है। इसे सर्वोत्तम एकादशी के रूप में जाना जाता है। भारी संख्या में लोग इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु जी की अराधना करते हैं। मान्यता है कि जया एकादशी के दिन चावल और उससे बनी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सनातन परंपरा में विश्वास रखने वालों को बाल और नाखून भी नहीं कटाने चाहिए। ऐसा करने पर महापाप लगता है। ऐसे में आइए हम आपको वर्ष 2026 की जया एकादशी के बारे में बताने की कोशिश करते हैं।
जया एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम!
यूं तो हर माह में दो एकादशी आती हैं। हर एकादशी का अपना धार्मिक महत्व है। सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले लोग एकादशी व्रत कर भगवान विष्णु की अराधना करते हैं। लोगों को जया एकादशी का खास इतंजार रहता है जो 29 जनवरी को पड़ रही है। जनवरी के अंतिम सप्ताह में पड़ने वाली इस एकादशी पर आप भूलकर भी नाखून न काटें। जया एकादशी पर बाल भी न कटाएं। इसके अलावा लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन कत्तई न करें। संभव हो ते इस दिन तेल, साबुन या शैम्पू आदि भी न लगाएं। मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना महापाप की श्रेणी में आता है।
चावल और इन पदार्थों का सेवन न करें!
मान्यताओं के अनुसार किसी भी एकादशी पर लोगों को चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। जया एकादशी पर ये परंपरा कायम रखनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब ब्रह्माजी ने अन्न का निर्माण किया, तब उससे पाप-पुुरुष भी उत्पन्न हुआ। एकादशी के दिन वह धान्य (चावल) में निवास करता है। यही वजह है कि लोग एकादशी में चावल का सेवन नहीं करते। इसके अलावा चावल से बनी अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन भी गलत है। लोगों को एकादशी के दिन ऐसा न करने की सलाह दी जाती है।
Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।
