Kalashtami 2023: सभी परेशानियों से पाना है छुटकारा तो इस विधि से करें कालभैरव की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

मान्यताओं के अनुसार, कालष्टमी की पूजा हर महीने की जाती है। इस दिन पूजा अर्चना करने से भक्तों के जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती है। इसलिए सभी भक्तों को काल भैरव की पूजा इस शुभ निश्चित रूप से करनी चाहिए।

Kalashtami 2023: देवों के देव महादेव सभी भक्तों की सारे मनोरथों को पूर्ण करते हैं। कहा जाता है जो भक्त महादेव की सच्ची भक्ति करता है उसके जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती है। मगर जब महादेव क्रोधित हो जाते हैं तो इनके प्रकोप से कोई नहीं बच सकता है। बता दें, महादेव के क्रोध से काल भैरव की उत्पत्ति हुई है। वहीं हर महीने काल भैरव की पूजा-अर्चना कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को की जाती है। इस शुभ दिन को कालाष्टमी की पूजा कहते हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जो भी भक्त भगवान की सच्ची भक्ति करता है उसके जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती है। इसके अलावा ग्रहों में उलटफेर के कारण आने वाली परेशानियों से भी निवारण मिल जाता है। इसलिए भक्तों को कालाष्टमी के दिन इस पूजा विधि से काल भैरव की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

इस महीने इस तारीख को की जाएगी काल भैरव की पूजा

तंत्र साधना को लेकर काल भैरव की पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं इस महीने कालाष्टमी 14 मार्च को है। इस दिन सभी भक्त सच्चे मन से काल-भैरव की पूजा अर्चना करते हैं। वहीं पूजा के शुभ मुहूर्त एवं तिथि की शुरुआत 14 मार्च की रात 8 बजकर 22 मिनट से शुरु हो रही है। इस मुहूर्त का समापन 15 मार्च की शाम 06 बजकर 45 मिनट पर होगा। इसलिए पूजा 14 के रात्रि में की जाएगी।

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इस विधि से करें महादेव की पूजा

स्टेप 1: सबसे पहले काल भैरव की मूर्ति घर में स्थापित करें।

स्टेप 2: भगवान के समक्ष सरसों के तेल का दीप जलाएं।

स्टेप 3: शिवलिंग पर जल, फूल और अक्षत अर्पित करें।

स्टेप 4: इस दिन कुत्ते और मीठी रोटी खिलाएं।

स्टेप 5: किसी भी जानवर के साथ आज के साथ खराब व्यवहार न करें।

स्टेप 6: पूजा की आरती और कथा के साथ भगवान के पूजा का समापन करें।

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