Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का क्या है वैज्ञानिक कारण? जानें उत्तरी गोलार्ध में अध्यात्म का महत्व

Mahashivratri 2026 पर हम आपको बताएंगे कि उत्तरी गोलार्ध में इस तिथि का अध्यात्मिक महत्व क्या होता है। इसके साथ ही हम महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का वैज्ञानिक कारण भी बताएंगे।

Mahashivratri 2026: फरवरी की 15 तारीख शिव भक्तों के लिए बेहद खास है। दरअसल, 15 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाला शिवरात्रि पर्व है। इस दिन शिवालयों में लंबी-लंबी कतारें लगेंगी। भगवान भोलेनाथ में आस्था रखने वाले लोग व्रत रखकर आशीर्वाद प्राप्त करने की लालसा रखेंगे।

महाशिवरात्रि को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी होते हैं। मसलन इस तिथि पर रात्रि जागरण का वैज्ञानिक कारण क्या है? उत्तरी गोलार्ध में महाशिवरात्रि का अध्यात्मिक महत्व क्या है? ऐसे तमाम सवाल हैं जो तेजी से उठ रहे हैं। उन सभी सवालों का जवाब जानने की कोशिश करेंगे।

महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का क्या है वैज्ञानिक कारण?

15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पर रात्रि जागरण का वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो महाशिवरात्रि की रात में ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति होती है। इस दौरान ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध ऐसी अवस्था में होता है कि लोगों के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाने लगती है।

यही वजह है कि लोगों को महाशिवरात्रि की रात रात्रि जागरण करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक कारण के मुताबिक भगवान शिव और माता पार्वती महाशिवरात्रि की रात भ्रमण पर निकलते हैं। मान्यता है कि जो लोग महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण करते हैं, उन पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा होती है। यही वजह है लोग इस रात जागरण कर भगवान भोलेनाथ की अराधना करते हैं।

उत्तरी गोलार्ध में महाशिवरात्रि का अध्यात्मिक महत्व!

भगवान भोलेनाथ के वैराग्य जीवन को छोड़ गृहस्थ जीवन में प्रवेश वाली तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। उत्तरी गोलार्ध में इसका खास अध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात योग और साधना करने वालों के लिए सबसे उपयुक्त है।

इस दिन प्रकृति खुद व्यक्ति को आध्यात्मिक शिखर तक पहुंचने में मदद करती है। महाशिवरात्रि की रात उत्तरी गोलार्ध में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के कारण, मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है। यही वजह है कि उत्तरी गोलार्ध के लिए आज का दिन खास माना गया है।

Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।

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