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जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में आईसीसीएआई काफ्रेंस, एआई और स्मार्ट कम्यूनिकेशन पर हुई चर्चा

जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय इंटरनेशनल कॉफेंस कम्यूनिकेशन एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (आईसीसीएआई 21) का आयोजन हुआ। कॉफ्रेंस के मुख्य अतिथि एसएसी/ इसरो के पूर्व डायरेक्टर प्रो. दीपक दास ने विद्यार्थियों को एआई की महत्वता और उसके प्रयोगों के बारे में विस्तार से समझाया। मुख्य अतिथि एसएसी / इसरो के पूर्व डायरेक्टर प्रो. दीपक दास ने कहा कि आने वाला समय तकनीक का होगा। इंटरनेट आफ विंग्स, बिग डॉटा आटोमोटिव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी और स्मार्ट कम्युनिकेशन में इजी तकनीकों का प्रयोग बढ़ने वाला है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में प्रत्येक व्यक्ति के पास कई स्मार्ट उपकरण होंगे। साथ ही उन्होंने पाठ्यक्रम को अनुसंधान से जोड़ने की बात कही।

विशिष्ट अतिथि एनफेस के मुख्य उत्पाद अधिकारी प्रशांत पेरूगुल्ली ने बताया कि मौजूदा समय में विश्व की कुल ऊर्जा का तीन प्रतिशत डाटा स्टोरेज के लिए उपयोग किया जा रहा है। उद्योग में आवृत्ति बढ़ाने, ऊर्जा की खपत कम करने, आकार कम करने और मूल्य कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य में न्यूरोमार्फिक कंप्यूटर क्वांटम कंप्यूटर और बायोलोजिकल कंप्यूटर प्रचलन में आएंगे। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक ऐसा विचार है जिसे पहले वास्तविकता से बहुत दूर माना जाता था, और केवल विज्ञान कथाओं तक ही सीमित था, लेकिन मशीन लर्निंग (एमएल) और डीप लर्निंग (डीएल) के हालिया विकास ने इस धारणा को काफी बदल दिया है।

एसोसिएट डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ अशीष शुक्ला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विभिन्न विषयों में अनुसंधान के लिए यह उच्च समय है। नए नए अनुसंधानों से देश विकासशील राह पर अग्रसर होगा। कॉफेस के दूसरे सत्र में मुख्य अतिथि लेकहेट यूनिवर्सिटी कलाटों से प्रो. सबाह मोहम्मद ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एजाई) और मशीन लर्निंग से चौथी औद्योगिक क्रांति सभव है। इसलिए एआई और मशीन लर्निंग को पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए उसकी पढ़ाई करवाई जानी चाहिए। उद्योग जगत से जुड़ने वाले युवा एआई व मशीन लर्निंग की तकनीक से उद्योगों को नई दिशा देंगे।
एनफ्रेंस के सीनियर मैनेजर रघुवंश गुप्ता ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग शहरी क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने में प्रयोग किया जा सकता है। इसमें जीपीएस से वाहन की ट्रैकिंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, मैप से रास्ता समझा जा सकता है। अन्य कीनोट स्पीकरों ने भी दूरसंचार प्रौद्योगिकी, उच्च शक्ति बीएलएस आई इमेज प्रोसेसिंग, न्यूरल नेटवर्क, फजी लोजिक, मशीन लर्निंग, सॉफ्ट कम्प्यूटिंग, क्लाउड कम्प्यूटिंग आदि पर चर्चा की।

कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता एवं प्रतिकुलपति प्रो अनूप कुमार गुप्ता ने भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि कॉफेस में देश-विदेश से 195 शोध पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 58 शोध पत्रों का चयन किया गया विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार देवलिया ने तीन श्रेणियों में पुरुस्कारों की घोषणा की बेस्ट पेपर प्रथम श्रेणी में दिव्या तिवारी एवं परेश चंद्र साहू, इनोवेटिव रिसर्च द्वितीय श्रेणी में भारती एस एवं निष्ठा पाराशर तथा बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन तृतीय श्रेणी में धीरज कालरा, पल्लवी श्रीवास्तव एवं एस सारख्या ने बाजी मारी। इस अवसर पर झरना अग्रवाल, सलोनी बंसल, नीरा हेमत रावत, करिश्मा यादव, काजल पाराशर, ईमा सिंह, सावंशत लखियानी व श्रुति गुप्ता का सहयोग सराहनीय रहा। अभय चतुर्वेदी ने कॉग्रेस के सभी शोधकर्ताओं व अतिथियों को धन्यवाद दिया।

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