Uric Acid: शरीर में यूरिक एसिड बढ़ते ही हड्डियां दर्द से करहाने लगती हैं। जिसकी वजह से पीड़ितों को काफी परेशानी होती है। यूरिक एसिड में जोड़ों में तेज दर्द, सूजन के साथ होता है। गठिया बढ़ने से पैर के अंगूठे, टखनों में भयंकर दर्द होता है। यूरिक एसिड सिर्फ हड्डियों पर असर नहीं डालती बल्कि इससे हार्ट की बीमारी, डायबिटिजी, हाई ब्लड प्रेशर , किडनी की गंभीर बीमारी तक हो सकती है। यूरिक एसिड में प्रोटीन से युक्त चीजों को ना खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ये प्रोटीन से बनने वाले प्यूटीन की वजह से होता है। जिसकी वजह से मरीज को दाल भी सोच समझकर खानी पड़ती है. क्योंकि दालों में बहुत ज्यादा प्यूटीन होता है। अगर आप भी कंफ्यूज हैं कि, कौन सी दाल खाएं तो डॉक्टर के द्वारा दी जा रही इस खास जानकारी को जान लें।
Uric Acid में कौन सी दाल खाएं?
यूरिक एसिड में कौन सी दाल खानी चाहिए? इसकी जानकारी डॉक्टर नम्रता श्रीवास्तव के द्वारा दी जा रही है। वो वीडियो में बता रही हैं कि, बढ़े हुए यूरिक एसिड के मरीजों को मूंग की दाल खानी चाहिए। मूंग छिलके और बिना छिलके वाली दोनों खा सकते हैं।
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इसके साथ ही साबुत मूंग दाल भी खा सकते हैं। लेकिन इन्हें पकाने से पहले 2 से ढ़ाई घंटे तक इसे भिगो लें। इसके बाद इसे पकाएं। इससे प्यूरीन की मात्रा और भी कम हो जाती है।मूंग की दाल में प्यूरीन बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही ये बहुत जल्दी पचती भी है। इस दाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये सूजन को कम करता है और दर्द से राहत देती है। इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर पेट के लिए अच्छा होता है। यूरिक एसिड में मूंग दाल के साथ-साथ मसूर और उड़द की दाल का सेवन कर सकते हैं, लेकिन भिगोकर ही पकाएं।
यूरिक एसिड क्या होता है?
यूरिक एसिड शरीर वेस्ट है। जो पेशाब के जरिए बाहर निकलता है। लेकिन जब ये हमारे शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है तो हड्डियों मेंजमा हो जाता है। जिसकी वजह से किडनी और जोड़ों को प्रभावित करता है।यूरिक एसिड प्रोटीन के टूटने से बनने वाले प्यूरीन के कारण बढ़ता है। यही वजह है कि, यूरिक एसिड के मरीज को प्रोटीन वाली चीजों को ना खाने की सलाह दी जाती है। इस दौरान मीट नहीं खाना चाहिए।
यूरिक एसिड कैसे बढ़ता है?
यूरिक एसिड को बढ़ाने में खराब खान-पान और लाइफस्टाइल की बड़ी भूमिका होती है। इसीलिए तले-भूने और पैकेट बंद फूड को खाने से मना किया जाता है। इसके साथ ही अधिक शराब पीने वाले लोगों को भी ये समस्या हो सकती है। वहीं, किडनी और डायबिटीज की दवाओँ का सेवन भी इसे बढ़ा सकता हैं।
