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अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शाह अहमदज़ई का 78 साल की उम्र में निधन

अफगानिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शाह अहमदजई का निधन हो गया है. उन्होंने 78 साल की उम्र में अफगानिस्तान में अंतिम सांस ली.

डीएनपी डेस्क: अफगानिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शाह अहमदजई का निधन हो गया है. उन्होंने 78 साल की उम्र में अफगानिस्तान में अंतिम सांस ली. साल 1992 से 1994 तक अहमद शाह अहमदजई विभिन्न प्रमुख पदों पर अफगानिस्तान की सरकार में कार्यरत रहे हैं. इसके बाद उन्होंने साल 1995 से 1996 तक प्रधानमंत्री के तौर पर अफगानिस्तान की सेवा की है. बता दें कि इसके बाद तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. जिसके बाद उन्होंने देश को छोड़ दिय था. अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शाह अहमदजई तब से लेकर इस महीने के कुछ दिन पहले तक भारत में ही रह रहे थे. हालांकि इसी महीने अहमद शाह अहमदजई भारत से अफगानिस्तान लौटे थे.

कौन हैं अहमद शाह अहमदज़ई

अहमद शाह अहमदज़ई का जन्म अफगानिस्तान के काबुल प्रांत के खाकी जब्बार जिले के मलंग गांव में हुआ था. बताया जाता है कि उन्होंने अफगानिस्तान के ही काबुल विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अहमद शाह अहमदज़ई को संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी में अध्ययन करने के लिए साल 1972 में छात्रवृत्ति दी गई थी.

जिसके बाद उन्होंने साल 1975 में मास्टर डिग्री प्राप्त की और सऊदी अरब में किंग फैसल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बन गए. बता दें कि अहमद शाह अहमदज़ई की राजनीतिक जिंदगी चुनौती पूर्ण रहा है. उन्होंने सर्वप्रथम अफगानिस्तान के कृषि मंत्रालय में काम किया था.

साल 1978 अहमद शाह अहमदज़ई की जिंदगी का वो पल था जब मुजाहिदीन में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान लौट आए. बताया जाता है कि इसी साल कम्युनिस्ट का तख्तापलट हुआ था और इसी के बाद वो अफगानिस्तान में वापस आए थे. इतिहास के पन्नों में अहमद शाह अहमदज़ई को बुरहानुद्दीन रब्बानी के करीबी सहयोगी के रुप में दिखाया जाता है. जो सच है भी. आपको बता दें के अफगानिस्तान वापस आने के बाद अहमद शाह अहमदज़ई ने राजनीतिक जीवन की एक नई शुरुआत की. वो जमीयत-ए-इस्लामी पार्टी के डिप्टी बने. हालांकि उन्होंने इसे भी कुछ दिन के अंतराल पर ही छोड़ दिया और 1992 में अब्दुल रसूल सय्यफ के इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफगानिस्तान पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद वो राजनीतिक जीवन में दिन प्रतिदिन एक नई मुकाम को हासिल करते रहे. वो कम्युनिस्ट के बाद की अफगान सरकार में एक मंत्री के रूप में विभिन्न आंतरिक, निर्माण और शिक्षा मंत्री के रूप में पदभार संभाला और बाद में 1995 और 1996 के बीच प्रधानमंत्री के रुप में अफगानिस्तान की सेवा की.

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