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378 दिन बाद सरकार और किसानों के बीच बनी बात, इन 5 मुद्दों पर बनी सहमति

लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद अब किसान संघ ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि 11 दिसंबर से किसान बॉर्डर को खाली करना शुरू कर देंगे। किसानों और सरकार के बीच सहमति बन चुकी है।

लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद अब किसान संघ ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि 11 दिसंबर से किसान बॉर्डर को खाली करना शुरू कर देंगे। किसानों और सरकार के बीच सहमति बन चुकी है। अब केंद्र सरकार की तरफ से  एक लेटर जारी किया गया है जिसमें उन मुद्दों का उल्लेख किया गया है जिसकी वजह से दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है। ये लेटर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने जारी किया है। लेटर में सारी मांगे मानने के बाद किसानों से आंदोलन वापसी का अनुरोध भी किया गया है। तो चलिए जानते हैं कि दोनों पक्षों के बीच किन मुद्दों को लेकर सहमति बनी है।

किन मुद्दों पर बनी सहमति

MSP– सरकार द्वारा जारी एक पत्र के मुताबिक किसानों की सारी मांगे मान ली गई हैं। पत्र में लिखा है कि एमएसपी को लेकर पीएम मोदी और कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है। जिसमें  केंद्र और राज्य सरकार, किसानों संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। ये भी साफ किया गया है कि इसमें किसान प्रतिनिधि में एसकेएम के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस कमेटी का काम होगा कि देश के किसानों को एमएसपी मिलना किस तरह सुनिश्चित किया जाए।


केस वापसी– किसान आंदोलन के समय किसानों पर दर्ज हुए केस वापस लिए जाएंगे। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्य ने केस वापसी को लेकर सहमति जताई है। भारत सरकार सभी राज्यों से अपील करती है कि किसान आंदोलन से संबंधित केसों को बाकी राज्य भी वापस लेने की कार्रवाई करें।


मुआवजा– मुआवजे को लेकर पत्र में कहा गया कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार ने सहमति दे दी है।


बिजली बिल– बिजली बिल को लेकर कहा गया कि पहले सभी स्टेकहोल्डर्स से बात होगी और चर्चा होने के बाद ही बिल संसद में पेश किया जाएगा।

यह भी पढ़े:किसानों की घर वापसी….किसान आंदोलन के 378 दिनों में किसानों ने क्या-क्या सहा?


प्रदूषण कानून– पराली को लेकर कहा गया कि भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा 14 और 15 से किसानों को मुक्ति दी जाती है।

गौरतलब है कि किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने सहमति के बाद कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व वाले किसान आंदोलन को निलंबित किया जा रहा है क्योंकि केंद्र हमारी मांगों पर सहमत हो गया है। हालांकि हर महीने समीक्षा बैठक होगी। जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। नेता ने चेतावनी देते हुए ये भी कहा कि अगर केंद्र अपने वादों से पीछे हटता है” तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।

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