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24 नवंबर को कैबिनेट करेगा बड़ी बैठक, तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के प्रस्ताव को मिल सकती है मंजूरी

केंद्रीय सरकार ने शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा कर दी थी जिसके बाद अब संसद में बिल पास होना बाकी है। किसानों का धरना प्रदर्शन अभी तक जारी है। उनका कहना है कि अभी सिर्फ घोषणा हुई है संसद तक कानून नहीं पहुंचा है।

केंद्रीय सरकार ने शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा कर दी थी जिसके बाद अब संसद में बिल पास होना बाकी है। किसानों का धरना प्रदर्शन अभी तक जारी है। उनका कहना है कि अभी सिर्फ घोषणा हुई है संसद तक कानून नहीं पहुंचा है। जब तक संसद से बिल वापसी नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब केंद्र सरकार ने भी बुधवार को मीटिंग का प्लान किया है जिसमें कृषि कानून को वापस लेने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी। सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल इस बुधवार की शुरुआत में तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मंजूरी दे सकता है।

कैबिनेट 24 नवंबर को करेगा बैठक

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैबिनेट 24 नवंबर (बुधवार) को एक बैठक करेगी, जिसके दौरान वह किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020 को वापस लेने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी देगी, जिसे सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित किया गया था। गौरतलब है कि ये ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक टेलीविजन संबोधन में, विवादास्पद फार्म बिल 2020 को रद्द करने के सरकार के फैसले की घोषणा के बाद आया है, जिस पर सैकड़ों किसान लगभग एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। शुक्रवार को देश को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा था कि तीन कृषि कानून किसानों के लाभ के लिए थे लेकिन उनकी सरकार सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद किसानों के एक वर्ग को मना नहीं सकी”। उन्होंने कहा कि मैं देश की जनता से सच्चे और शुद्ध मन से माफी मांगता हूं… हम किसानों को नहीं समझा पाए। हमारे प्रयासों में कुछ कमी रही होगी कि हम कुछ किसानों को मना नहीं सके।

यह भी पढ़े: 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे किसान, जारी रहेगा किसानों का आंदोलन

किसान अपनी मांगों को लेकर अडिग


गौरतलब है कि  किसान तीन कृषि कानूनों के अलावा एमएसपी, आंदोलन में मारे गये किसानों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर भी अडिग हैं। उनका कहना है कि किसानों पर इस वक्त रोजी-रोटी का संकट है और सरकार को किसानों के प्रति संवेदना को  समझना होगा।  29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान तीनों कानूनों को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया जाएगा। वहीं 29 नवंबर को ही किसानों का जत्था संसद के लिए ट्रैक्टरों के कूच करेगा।

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