Homeख़ास खबरेंकार्तिक पूर्णिमा पर उज्जैन में गधों का अद्भुत मेला, सबसे महंगी भूरी...

कार्तिक पूर्णिमा पर उज्जैन में गधों का अद्भुत मेला, सबसे महंगी भूरी घोड़ी तो कंगना-आर्यन का रहा जलवा

हिन्दुस्तान को आस्था का सबसे बड़ा देश कहा जाता है। उज्जैन में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हर साल गधों का मेला लगता है। मेले में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा कंगना और आर्यन नाम के गधे की जोड़ी की रही। इस जोड़ी ने जमकर सुर्खियां बटोरीं। जोड़ी को हाथों हाथ एक व्यापारी ने 34 हजार रुपये में खरीद भी लिया। इसके अलावा वैक्सीन नाम का गधा भी 14 हजार रुपए में बिका। इसके अलावा इसमें भूरी घोड़ी की कीमत 2 लाख रुपए लगाई गई। बड़नगर रोड पर शिप्रा नदी किनारे करीब 100 से ज्यादा गधे और घोड़े बिकने लाए गए। गधों के मेले में बड़ी रौनक दिखाई दी. यहां कई बड़े-छोटे गधे और घोड़ों के खरीदार पहुंचे थे।

वैक्सीन घोड़े की हर तरफ चर्चा

कार्तिक पूर्णिमा मेले में कोरोना वैक्सीन लगाने में जो लोग आनाकानी कर रहे हैं, ऐसे लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए एक गधे का नाम वैक्सीन रखा गया। इस वैक्सीन नाम के गधे की कीमत 14 हजार तय की गई। मेले के सरंक्षक हरिओम प्रजापति ने बताया कि ट्रेंड में चल रही खबरों और व्यक्तियों के नाम रखने से गधों की पहचान और सौदे भी जल्दी हो जाते हैं। इसी के चलते गधे और घोड़ों के नाम इस तरह रखे जाते हैं, ताकि खरीदने वाले उन पर ज्यादा ध्यान दे सकें। वैक्सीन नाम का गधा भी इसलिए इस बार मेले में रखा गया, ताकि जो भी व्यापारी आए तो वैक्सीन लगवाने का प्रण लेकर जाए। दूसरों को भी प्रोत्साहित करे।

भूरी और बादल की कीमतों पर सुर्खियां

मेले में घोड़े बिकने आए हैं इसमें सबसे महंगी घोड़ी भूरी की कीमत 2 लाख रुपए तय की गई है, जबकि बादल नाम के घोड़े के दाम डेढ़ लाख रुपए रखे गए हैं। घोड़ी के ज्यादा दाम के पीछे तर्क है कि घोड़ी शादियों में काम आती है। गधों के सौदागर इस बार केवल राजस्थान व महाराष्ट्र के कुछ इलाकों के अलावा सुसनेर, शाजापुर, जीरापुर, भोपाल, मक्सी, सारंगपुर से आए हैं। प्रजापति ने कहा कि इस बार कोरोना का डर कम नहीं हुआ था। साथ ही, सरकार ने भी गाइडलाइन स्पष्ट रूप से नहीं बताई थी। इसके चलते गधों का व्यापार करने वाले इस बार कम संख्या में ही आए। साथ ही प्रजापत बताते हैं कि पहले गधों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन में भी किया जाता था। अब केवल माल ढुलाई उसमें भी सबसे ज्यादा बिल्डिंग मटेरियल की ढुलाई के काम आ रहे हैं। इसके अलावा, ईंट-भट्‌टों में भी किया जाता है।

गधों की कैसे लगती है कीमत

गधे को खरीदने वाले आए व्यापारी ने बताया कि गधों की कीमत उनके दांत देखकर तय की जाती है। कम उम्र के गधों का दाम अधिक होता है। उन्होंने बताया कि दांत से गधे की उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। अमूमन गधों की कीमत 3 हजार रुपए से शुरू होती है। इनकी अधिकतम उम्र 4 से 5 साल होती है। इसके बाद बूढ़ा हो जाता है। मध्यप्रदेश में गधों का मेला कहां लगता है? यह सवाल MPPSC की 2016 की परीक्षा में पूछा गया था। इसमें चार विकल्प दिए गए थे। भोपाल, रीवा, उज्जैन और सोडलपुर। गधों का मेला उज्जैन के अलावा जयपुर के पास भावगढ़ में भी लगता है। वहां गधों के अलावा कोई और जानवर बिकने नहीं आता।

Enter Your Email To get daily Newsletter in your inbox

- Advertisement -
- Advertisement -

Latest पोस्ट

Related News

- Advertisement -