Homeख़ास खबरेंकिसानों की घर वापसी....किसान आंदोलन के 378 दिनों में किसानों ने क्या-क्या...

किसानों की घर वापसी….किसान आंदोलन के 378 दिनों में किसानों ने क्या-क्या सहा?

एक साल से ज्यादा कृषि कानूनों का विरोध करते-करते किसानों को आखिर विजय मिली और सरकार को मजबूर होकर अपने द्वारा बनाएं गए दिनों कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा। अब किसानों ने भी एक कदम आगे बढ़ते हुए किसान आंदोलन को खत्म कर देने का एलान कर दिया है। ये आंदोलन 378 दिन बाद खत्म हुआ है। लेकिन ये 378 दिन किसानो के लिए इतने आसान नहीं थे जितना लगता है।

इस दौरान किसानों ने सर्दी, गर्मी बरसात और भीषण गर्मी के साथ-साथ प्रशासन का डंडा और जोर भी खूब देखा।किसानों आंदोलन की शुरुआत किसानों के दिल्ली पहुंचने से पहले ही तब शुरू हो गई थी, जब सरकार जून के पहले सप्ताह में कोरोना काल के बीच तीन कृषि अध्यादेश लाई। तभी से किसानो का विरोध होना शुरू हो गया।

गस्त में किसानों ने जेल भरो आंदोलन किया और सैकड़ों किसानों ने गिरफ्तारियां दी। 10 अगस्त को पंजाब के किसानों ने अन्नदाता जागरण अभियान की शुरूआत की।

4 सितंबर, 2020 को कृषि कानून बिल लोकसभा में पेश किया गया, जो 17 सितंबर, 2020 को पास हुआ। इसके बाद देशभर में किसानों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। 27 सितंबर 2020 को दोनों सदनों से पास बिलों पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किए। इसके बाद कृषि बिलों ने कृषि कानूनों का रूप लिया। इस दौरान विपक्ष और किसानो का विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

पंजाब में किसानों ने पहले तो 24 से 26 सितंबर 2020 तक रेल रोकी उसके बाद एक अक्तूबर से कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के किसान संगठनों ने राशन और तंबू कनात लेकर रेलवे ट्रैक, हाईवे पर डेरा डाल दिया। उसके बाद तो ये आंदोलन लगातार बढ़ता ही चला गया।

कुछ समय बाद, किसानों के परिवारों से महिलाएं और बच्चे भी सिंघू, टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर पर जारी विरोध प्रदर्शन में शामिल होते दिखाई दिए। इसके बाद 26 जनवरी को जब किसान दिल्ली में घुसे तो ये विरोध प्रदर्शन हिंसक हो उठा और ऐसा लगा कि अब ये विरोध प्रदर्शन ख़त्म हो सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और किसान बेहद मजबूती से आगे बढ़े।

इस दौरान कई सारे किसानों ने अपनी जान गवांई कई सारी बातें सुनी और दुनिया के कई सारे देशों ने भी किसानों का साथ दिया। इस सबके साथ जब विरोध प्रदर्शन जारी था और सरकार एवं किसान संगठनों के बीच बात बनती नहीं दिख रही थी। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को ये ऐलान किया कि वह इन तीनों क़ानूनों को वापस लेने जा रहे है।

यूनियन कैबिनेट ने बीती 24 नवंबर को ये तय कर दिया है कि इस क़ानून को संसद के शीतकालीन सत्र में वापस लिया जाएगा और उसके बाद ये कानून वापस भी ले लिए गए। आज किसानों ने भी दिल्ली की सीमाओं को खाली करने का एलान करते हुए कहा कि, वह 11 दिसंबर से सभी किसान अपने घरों को लौट जाएंगे।

ये भी पढ़ें

देश और दुनिया की तमाम खबरों के लिए हमारा YouTube Channel ‘DNP INDIA’ को अभी subscribe करें. आप हमें FACEBOOKINSTAGRAM और TWITTER पर भी फॉलो पर सकते हैं.

Enter Your Email To get daily Newsletter in your inbox

- Advertisement -
- Advertisement -

Latest पोस्ट

Related News

- Advertisement -