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बिजली संकट को लेकर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कही ये बात

मनीष सिसोदिया ने कहा कि संकट पर केंद्र सरकार आंख बंद कर लेती है. उन्होंने कहा कि अगर किल्लत है तो सरकार स्वीकार करे. वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने पिछले सप्ताह से लेकर अब तक विभिन्न न्यूज चैनलों को दिए साक्षात्कार में कहा है कि कोयला का स्टॉक कमा है ना कि बिजली गुल होने वाली है.

देश आज बिजली संकट की खबरों से चिंतित है. हर घर में उस अंधेरी रात की बात हो रही है जिस रात को लेकर टीवी न्यूज चैनलों पर हाय-तौबा मचा हुआ है. स्थिति कल की जैसी भी हो पर इतना सच है कि केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिन-रात जुटी हुई है. इसी बीच दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बिजली संकट को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है. दरअसल, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने दिल्ली को आपूर्ति की जाने वाली बिजली को लेकर कहा कि दिल्ली को जितनी जरुरत है उतनी बिजली मिल रही है और आगे भी मिलती रहेगी. केंद्रीय मंत्री के इस बयान को विपक्षी दलों ने राजनीतिक रंग देना शुरु कर दिया है.

आपको बता दें कि मनीष सिसोदिया ने कहा कि संकट पर केंद्र सरकार आंख बंद कर लेती है. उन्होंने कहा कि अगर किल्लत है तो सरकार स्वीकार करे. वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने पिछले सप्ताह से लेकर अब तक विभिन्न न्यूज चैनलों को दिए साक्षात्कार में कहा है कि कोयला का स्टॉक कमा है ना कि बिजली गुल होने वाली है. इसके बाद मनीष सिसोदिया ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, “केंद्र सरकार आज जिस मोड पर पहुंच गई है, इससे ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी से केंद्र सरकार नहीं चल पा रही है.” उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले आक्सीजन की कमी हुई थी. केंद्र सरकार मानने को तैयार नहीं थी कि देश में आक्सीजन की कमी है. बात दें कि आज देश हर साल बिजली की खपत के आकड़ों में वृद्धि कर रहा है. इसके पीछे की बात कही जाए तो गांव-गांव तक बिजली से घरों को जोड़ना और हर घर में बिजली की खपत कही जा सकती है.

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने कोयला संकट पर गलत जानकारी दी. उन्होंने कहा, “जैसे ऑक्सीजन संकट में लोग मरे थे, वैसे यहां भी त्राही त्राही मचेगी.” इसके साथ ही मनीष सिसोदिया ने कहा कि आंखे बंद करने की जो नीति है वो बहुत खतरनाक है. उन्होने कहा, “पूरे देश से आवाज़ उठ रही है कि ये कोयला संकट है. और ये कोयला संकट अंत में बिजली संकट में तब्दील हो सकता है. जिसका बहुत बड़ा संकट देश को झेलना होगा. देश ठप हो जाएगा. देश का सिस्टम ठप हो जाएगा.”

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