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सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे मो. उमर के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट

पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे मो. उमर पर आरोप है कि उन्होंने राजधानी के एक प्रॉपर्टी डीलर को जबरन अगवा किया। उसके साथ देवरिया जेल में मारा-पीट की उसके पश्चात प्रॉपर्टी डीलर से जबरन रंगदारी वसूलने चाही। इस मामले में सुनवाई कर रही सीबीआई की एक विशेष अदालत ने मो. उमर के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया है, विशेष अदालत की न्यायिक मजिस्ट्रेट समृद्धि मिश्रा ने मो. उमर के साथ-साथ उनके एक सहयोगी योगेश कुमार के लिए भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

21 अक्टूबर को विशेष अदालत ने आदेश जारी किया था कि दोनों ही फरार व्यक्तियों की संपत्ति को जब्त कर लिया जाए। इस मामले में 22 नवंबर को सीबीआई के सब-इंस्पेक्टर नीरज वर्मा ने अदालत में एक याचिका दायर की थी, उन्होंने याचिका में बताया कि मुजरिम मो. उमर का प्रयागराज स्थित एसबीआई व एचडीएफसी के बैंक एकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। जबकि मो. उमर की अचल सम्पति का ध्वस्तीकरण पहले ही किया जा चुका है। याचिका में नीरज वर्मा ने बताया कि अभियुक्त योगेश का हमारे पास जो पता दर्ज है, वह उसके रिश्तेदार का है। इस वजह से अब तक उसकी सम्पति का पता नहीं चल सका है।

Former SP MP Atiq Ahmed son Mohd umar arrest warrant against Learn about  the case in detail

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई थी जांच

थाना कृष्णा नगर के क्षेत्र में हुए इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, जांच के बाद स्थानीय पुलिस ने अतीक अहमद समेत आठ व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद 23 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी, इसके पश्चात 12 जून 2019 को सीबीआई ने अतीक अहमद, फारुख, जकी अहमद, मो. उमर, जफर उल्लाह, गुलाम सरवर और 12 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ की थी।

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सीबीआई ने दाखिल किया आरोप पत्र

सीबीआई ने इस मामले की जांच करने के बाद अतीक समेत अन्य अभियुक्तों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल,जबरिया वसूली, जानमाल की धमकी व साजिश रचने, बल्वा हत्या के लिए अपहरण,आदि जैसी आईपीसी की गंभीर धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। इन आरोपियों का मुकदमा सुनवाई के लिए सत्र अदालत को भेजा गया है। सीबीआई केवल यहां नहीं रुकी इसके पश्चात उन्होंने अतीक अहमद के बेटे मो. उमर, योगेश कुमार, नीतेश मिश्रा व महेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ पूरक आरोप पत्र भी दाखिल किया। आपको बता दे नीतेश मिश्रा और महेंद्र कुमार सिंह ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था जिसके पश्चात उन्हें न्यायिक हिरासत में निरुद्ध किया गया।

SC orders CBI to probe kidnapping of businessman by former MP Atiq Ahmed,  transfers him to Gujarat jail | India News | Zee News

क्या था पूरा मामला

यह मामला 28 दिसंबर 2018 को शुरू हुआ जब रियल स्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल ने एफआईआर दर्ज करवाई, उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाते वक्त बताया था कि निरुद्ध अतीक ने अपने आदमियों के जरिए उनका गोमतीनगर ऑफिस से अपहरण कर लिया। बंदूक के जोर पर वह मोहित जायसवाल को देवरिया जेल लेकर गए जहां अतीक अहमद ने उन्हें एक सादे स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया, जब मोहित ने हस्ताक्षर करने से इंकार किया उसके पश्चात उमर और उनके कई आदमियों ने मिलकर मोहित की लोहे के रॉड से पिटाई की। पिटाई से जब मोहित बेसुध हो गए उसके पश्चात उनके हस्ताक्षर ले लिए गए और करीब 45 करोड़ की संपत्ति अपने नाम करवा ली और उन्हें धमकी दी की वह इस मामले में अपनी चुप्पी बनाए रखेंगे वरना बहुत बुरा होगा।

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