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Lifestyle: मॉर्डन शहरों की तुलना में कैसे दिखते है हमारे देश के शहर दिल्ली और मुंबई

Lifestyle: भारत जैसे विकासशील देशों के शहरों और मॉडर्न शहरों के ट्रेंड भी काफ़ी अलग देखने को मिलते हैं। अमेरिका में जहाँ 82 फ़ीसदी आबादी शहरी इलाकों में रहती है वहीं यूरोप में 74 फ़ीसदी आबादी रहती है। इसके अलावा ओसिनिया में 68 फ़ीसदी आबादी शहरी इलाकों में रहती है। दूसरी ओर एशिया में 50 फ़ीसदी आबादी शहरों में रहती है। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में साल 2050 तक शहरी आबादी 40 करोड़ और बढ़ जाएगी।

दूसरे देशों की बात करें तो चीन में 25 करोड़, अफ़्रीका देश नाइजीरिया में 19 करोड़ लोग अब तक शहरों में रह रहे है। वो भी कमोबेश दुनिया के हर देश में इसी अनुपात में शहरों पर बोझ पड़ेगा। साल 2030 तक दुनियाभर में 43 ऐसी मेगा सिटी होगी जहाँ की आबादी एक करोड़ से अधिक होगी। इनमें से अधिकांश भारत जैसे विकासशील देशों में होगी। इसी बड़ी आबादी के लिए इतना ही व्यापक सुविधाओं की भी ज़रूरत होती है ऐसे वक़्त में जब दुनिया के तमाम बड़े शहर पॉल्यूशन की मार झेल रहे हैं।

एक बड़ी चुनौती

अब बढ़ती आबादी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी, बिजली, खाना, मकान, स्वच्छता आदि सुविधा जुटाना शहरी प्लान्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। एशिया अफ़्रीका के इन शहरों में जहाँ तेज़ी से आबादी बढ़ रही हैं। वहीं इन शहरों में सुविधाओं का हाल भी बदहाल है। दूसरी ओर दुनिया के कई शहर है जहाँ आबादी कंट्रोल में आ रही है या घट रही है। साल 2000 के बाद जापान के टोक्यो शहर में, साउथ कोरिया के सियोल में और पोलैंड, रोमानिया, यूक्रेन समेत यूरोप के कई देशों में शहरों में आबादी घटने का ट्रेंड देखा जा रहा है।

आधुनिक शहर माना जाता

जिन शहरों में सुविधाएँ बेहतरीन है वहीं आबादी कंट्रोल में होने से लाइफ़स्टाइल और बेहतरीन हो गई है। बता दें कि जापान के टोक्यो शहर को आज दुनिया का सबसे सिस्टमैटिक और आधुनिक शहर माना जाता है। वहीं दिल्ली मुंबई में भीड़-भाड़ वाले शहरों की तरह ही 1 करोड़ 30 लाख की आबादी बनी रहती है लेकिन तकनीकी बल पर सुविधाएँ बेहतरीन है। टोक्यो शहर की आर्किटैक्ट सडको पर हर तरफ़ नई तकनीक का इस्तेमाल, 200 किलोमीटर की स्पीड से चल रही लोकल ट्रेनों का नेटवर्क या सुपर स्पीड वाली बुलेट ट्रेन, इसके अलावा बसों के समय में मिनट की भी देरी न होने का तकनीक सिस्टम आम शहरों से अलग है।

26 शहरों को मिलाकर बनता

टोक्यो एक ऐसा मेट्रोपोलिस है जो 26 शहरों को मिलाकर एक बनता है। लेकिन सिस्टम इस तरह से शहर को जुड़े हुए हैं, कहीं भी आपको इतनी विविधता का अहसास नहीं होगा। भीड़-भाड़ के बावजूद सड़कों पर रोड-रेज जैसी घटनाएँ टोक्यो में कहीं भी देखने को नहीं मिलती। लोग विनम्रता के साथ घर से निकलते हैं और अपनी ज़ुबान पर प्लीज़ और थैंक्यू शब्द हर जगह का इस्तेमाल करते हैं। लोग उन कामों से बचते है जिसने किसी भी दूसरे को परेशानी होती है।

हांगकांग शहर

हांगकांग शहर जहाँ भीड़ बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है वहीं आधुनिक सुविधाओं के विकास के कारण लोगों की ज़िंदगी काफ़ी आसान हो गई है। ट्रेन, बस आदि यहाँ की ट्रांसपोर्ट सुविधाओं को आधुनिक बनाया गया है। एक ज़माने में महामारी से जूझ रहे हांगकांग शहर में हाइजीन को लोगों की आदत में शामिल कराया था। शहर में पुरुषों की लाइफ़ एक्सपेटेंसी 81 साल जबकि महिलाओं की 87 साल है।

महामारी का असर केवल स्वच्छता बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी हुआ था। फ़्यूचर टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए हांगकांग ने ख़ुद को एक कैश फ़्री सोसाइटी के रूप में विकसित किया। ऑक्टोपस कार्ड नागरिकों के लिए शुरू किया गया जिसका इस्तेमाल लोग खाने पीने का सामान ख़रीदने, ट्रांसपोर्ट में पेमेंट करने और बाक़ी कामों को करने के लिए करते थे। UN की रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2050 तक दुनिया की 68 फ़ीसदी आबादी शहरी इलाकों में रह रही होगी।

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दुबई

फिशिंग विलेज के रूप में जाना जाने वाला दुबई आज मॉडर्न लाइफस्टाइल, टूरिज्म और लग्जरी लाइफ का दूसरा नाम है। सऊदी अरब के परंपरागत सामाजिक बंधनों के बीच अचानक उभरा मॉडर्न दुबई शहर दुनिया भर के लोगों को आज आकर्षित करता है। बुर्ज खलीफा जैसी गगनचुंबी इमारतें, डेजर्स रिजॉर्ट्स और भी लक्ज़री चीज़े देखने को मिलती है।

सिंगापुर

सिंगापुर आज दुनिया के सबसे आधुनिक शहरों में गिना जाता है. सिंगापुर शहर में पिछले पांच साल में स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी पर 158 बिलियन डॉलर की बड़ी राशि का निवेश हुआ है। यहां आधुनिक सुविधाओं और तकनीक पर सबकुछ विकसित करने के लिए सुपर-फास्ट ब्रॉडबैंड नेटवर्क और सभी के लिए फ्री वाई-फाई की सुविधा वहां की सरकार देती है, ताकि लोग ट्रांसपोर्ट से लेकर एजुकेशन तक की सारी स्मार्ट सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इस सुविधा के कारण लोगों के लिए ऑनलाइन शिक्षा, मेडिकलसेवा प्राप्त कर सके।

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