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Assembly Elections 2026: बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र हार चुकी कांग्रेस के लिए असम, बंगाल, केरल और तमिलनाडु में कितनी संभावना? क्या पलटेगी बाजी?

Assembly Elections 2026

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Assembly Elections 2026: दशक भर पहले की बात है जब देश में कांग्रेस के पैरालेल बीजेपी का उदय हुआ। उसके बाद से कांग्रेस लगातार पतन की ओर अग्रसर रही। कई राज्य चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन ज्यादातर चुनाव परिणाम पार्टी के प्रतिकूल रहे। अब हम 2026 में प्रवेश कर चुके हैं। इसी वर्ष असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं।

विगत वर्ष दिल्ली, बिहार और महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इसी साल पंजाब, गुजरात और ओडिशा में हुए उपचुनाव में भी राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी को मात झेलनी पड़ी थी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए कितनी संभावना है? क्या 2025 में कई चुनावी हार झेल चुकी पार्टी इस वर्ष बाजी पलटेगी? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ते हुए हालिया समीकरण पर चर्चा करते हैं।

असम, बंगाल, केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस के लिए कितनी संभावना?

इस सवाल का पुख्ता जवाब भविष्य के गर्भ में है। हालांकि, हालिया सियासी समीकरण को देखते हुए कयास जरूर लगाए जा सकते हैं।

असम– बारी-बारी से बात करें तो असम में कांग्रेस की स्थिति फिर खस्ता नजर आ रही है। इसकी वजह है पार्टी के दिग्गज नेता रहे भूपेन बोरा का साथ छोड़ना। प्रियंका गांधी को प्रभारी बनाकर कांग्रेस भले ही असम में ऊर्जा झोंक रही है। लेकिन स्थानीय स्तर पर गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। दूसरी ओर प्रतिद्वंदी के रूप में हिमंत बिस्व सरमा जैसे मजबूत नेता का सामने होना भी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा रहा है।

पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस की परेशानी बरकरार है। यहां ममता बनर्जी के समक्ष बीजेपी खुद को मुख्य विपक्ष की भूमिका में स्थापित कर चुकी है। कांग्रेस में अधीर रंजन चौधरी को छोड़ बंगाल से कोई एक चेहरा नहीं बन पाया है। संगठन स्तर पर भी बंगाल में कांग्रेस की स्थिति लचर है। ऐसे में यहां भी पार्टी के लिए ज्यादा संभावनाएं नहीं नजर आ रही हैं।

तमिलनाडु में जरूर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है। डीएमके के साथ सरकार में शामिल कांग्रेस एक बार फिर विधानसभा चुनाव 2026 में उतरने को तैयार है। गठबंधन का चेहरा एमके स्टालिन ही होंगे। यदि कांग्रेस बार्गेनिंग कर सीट शेयरिंग में इजाफा कर पाती है, तो तमिलनाडु  में पार्टी की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।

केरल में भी इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होंगे। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। शशि थरूर और अनुभवी नेता रमेश चेन्निथला के बीच सीएम फेस को लेकर मुकाबला हो सकता है। पार्टी के लिए सकारात्मक ये है कि केरल में एलडीएफ की सरकार के प्रति एंटी इनकंबेंसी है। निकाय चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। ऐसे में यहां समीकरण कांग्रेस के पक्ष में है।

क्या 2025 में करारी हार झेल चुकी कांग्रेस पलटेगी बाजी?

इस सवाल का पुख्ता जवाब भविष्य के गर्भ में है जो चुनावी परिणाम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पिछले वर्ष की बात करें तो कांग्रेस दिल्ली, बिहार और महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव बुरी तरह से हारी थी। कई उपचुनावों में भी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। हालांकि, अबकी बार तेलंगाना नगर निगम और केरल निकाय चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा है।

पार्टी प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पवन खेड़ा जैसे नेता लगातार पार्टी के लिए रणनीति बना रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2025 में करारी हार झेल चुकी कांग्रेस 2026 में असम, बंगाल, तमिलनाडु और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव में क्या हासिल करती है।

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