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Up Election 2022: जयंत चौधरी और अखिलेश ने मिलाए हाथ, क्‍या गठबंधन को लेकर बन गई बात ?

सपा मुखिया अखिलेश यादव से मंगलवार को एक बार फिर RLD के जयंत चौधरी ने मुलाकात की है।  अबकी बार की मुलाकात के बाद ये उम्मीद की जा रही है कि जिन सीटों पर गठबंधन को लेकर दोनों दलों में पेच फंसा था। उन पर बाद बन जाएगी। शायद इसीलिए अखिलेश यादव ने एक ट्वीट करते हुए लिखा है कि, श्री जयंत चौधरी के साथ बदलाव की ओर। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर ये संदेश जरूर दे दिया है। अब सीटों पर बात बन चुकी है। अखिलेश के ट्वीट के बाद रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी ट्वीट कर अखिलेश सुर में सुर मिलाया। वैसे दोनों दलों के बीच चुनाव में गठबंधन की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।

सपा-रालोद की बन गई बात !

जयंत ने सपा से 50 सीटों की मांग की है। सपा नेतृत्व ने रालोद को 30 से 32 तक सीट देने की पेशकश की है। जयंत चौधरी को डिप्टी सीएम का पद भी मिल सकता है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चार से पांच सीटें ऐसी भी हैं जिन पर दोनों दल अपने प्रत्याशी उतारने के कारण इन सीटों पर पेंच फंसा हुआ है। सबसे अहम मुद्दा चरथावाल विधानसभा सीट का है। इस सीट पर दोनों दल अपना उम्मीदवार उतारने पर अड़े हैं। हाल ही में सपा की साइकिल पर सवार हुए हरेन्द्र मलिक को अखिलेश इस सीट से टिकट देना चाहते हैं, जबकि जयंत खुद इस सीट से विधानसभा चुनाव में किश्मत आजमाना के लिए उत्सुक हैं। हालांकि जल्द ही अखिलेश यादव सीटों के बंटवारे का ऐलान भी कर सकते हैं। ऐसे में ये आने वाला वक्त ही बताएगा कि आखिर रालोद को सपा ने कितनी सीटें दी हैं।

छोटे दलों के साथ SP-RLD

अखिलेश यादव काफी पहले से कह रहे हैं कि वे यूपी के इस चुनाव में छोटे दलों के साथ गठबंधन करेंगे। समाजवादी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और जनवादी पार्टी के संजय चौहान के साथ गठबंधन का पहले ही ऐलान कर चुकी है। जयंत चौधरी ने भी 19 नवंबर को कहा था, इस महीने के अंत तक हम निर्णय लेंगे और साथ आएंगे। पहले खबरें आ रही थीं कि रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां अधिक से अधिक सीटें मांग रहा है तो वहीं मध्य और पूर्वांचल की कुछ सीटों पर भी उसका दावा है जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव बहुत सी सीटों पर असहमत हैं। इसी के चलते सीटों के बंटवारे में देरी हुई।

2017 का क्या था गणित ?

सपा और रालोद ने 2017 का विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव साथ मिलकर लड़ा था। दोनों ही दोनों के बीच गठबंधन का उद्देश्य पश्चिमी यूपी की महत्वपूर्ण सीटों पर मुस्लिम और जाट वोटों को मजबूत करना है। 2013 में मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा के बाद दोनों समुदायों के बीच संबंध तनावपूर्ण थे, विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में भाजपा को आगे बढ़ने में मदद मिली। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों में, भारतीय जनता पार्टी ने 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में से 312 सीटें हासिल की थी जबकि समाजवादी पार्टी ने 47, बहुजन समाजवादी पार्टी ने 19 सीटें जीतीं थीं।

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