BMC Mayor Row: ‘हमारी पार्टी का मेयर होगा!’ कैसे बीएमसी पर काबिज हो सकती है ठाकरे परिवार की बादशाहत? समीकरण देख महायुति हैरान

BMC Mayor Row: अल्पमत के बावजूद कैसे बीएमसी पर ठाकरे परिवार की बादशाहत कायम हो सकती है? उद्धव ठाकरे के एक बयान से इस नए समीकरण को बल मिल रहा है जो महायुति खेमा को हैरत में डाल सकता है।

BMC Mayor Row: कई नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रमों की भूमि रही मुंबई में एक और सियासी संग्राम छिड़ा है। देश के सबसे धनी नगर पालिका में मेयर बनाने को लेकर जद्दोजहद जारी है। एक ओर जहां बीजेपी-शिवसेना मुखरता से महायुति का मेयर बनाने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अल्पमत के बावजूद उद्धव ठाकरे ने बीएमसी पर अपना प्रभुत्व जारी रहने की बात कही है। शिवसेना यूबीटी नए समीकरण को देख मंद-मंद मुस्कुरा रही है, तो दूसरी ओर महायुति खेमा में हलचल है। ऐसे में हम आपको पूरी खबर बताने के साथ ये बताते हैं कैसे अल्पमत के बावजूद बीएमसी में शिवसेना यूबीटी का पार्षद मेयर बन सकता है।

कैसे बीएमसी पर काबिज हो सकती है ठाकरे परिवार की बादशाहत?

इसको लेकर लोगों के बीच अलग किस्म का कौतूहल है। बीजेपी-शिवसेना क्रमश: 89 और 29 सीटों के साथ कुल 118 सीटों पर जीत कर मेयर बनाने की स्थिति मे हैं। हालांकि, अभी महापौर पद के आरक्षण को लेकर फैसला आना बाकी है जो 22 जनवरी को लॉटरी के माध्यम से स्पष्ट होगा। यही खेल में नया ट्विस्ट ला रहा। खबरों की मानें तो लॉटरी के माध्यम से यह सुनिश्चित होगा बीएमसी का नया मेयर सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग में से किस श्रेणी से होगा। पिछली बार की देखें तो मेयर सामान्य वर्ग से बना था। ऐसे में अबकी बार मेयर का पद रोटेशन प्रणाली के तहत ओबीसी (महिला, पुरुष), अनुसूचित (महिला, पुरुष) या अनुसूचित जनजाति (महिला, पुरुष) के लिए जा सकता है।

यदि बात ओबीसी (महिला, पुरुष) या अनुसूचित जाति (महिला, पुरुष) से मेयर बनाने की आई, तब तो बीजेपी-शिवसेना दोनों के लिए राहत है। दोनों के पास ओबीसी और अनुसूचित श्रेणी से पार्षद हैं। लेकिन यदि पासा अनुसूचित जनजाति की ओर पलटा, तो नाटकीय दौर की शुरुआत होगी। बीएमसी की 227 वार्डों में से दो वार्ड में ही एसटी पार्षद हैं। वार्ड 53 से जितेंद्र वलवी और वार्ड 121 से प्रियदर्शिनी ठाकरे दोनों शिवसेना-यूबीटी के टिकट पर चुनाव जीते हैं। ऐसे में यदि लॉटरी के माध्यम से अनुसूचित जनजाति से बीएमसी मेयर बनाने की बात आई, तो शिवसेना यूबीटी बाजी मार सकती है।

नया समीकरण देख महायुति हैरान!

इस नए समीकरण को देख महायुति हैरान है। बीजेपी या शिवसेना शिंदे गुट के पास अनुसूचित जनजाति से कोई पार्षद नही हैं। वहीं शिवसेना यूबीटी के दो पार्षद अनुसूचित जनजाति से हैं जो बीएमसी मेयर चयन को लेकर जारी राजनीतिक खेल में नया ट्विस्ट ला रहे हैं। दूसरी ओर महायुति में मंथन का दौर जारी है। बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट दोनों की ओर से कहा गया है कि नया मेयर महायुति से होगा। लेकिन मेयर बीजेपी से बनेगा या शिंदे गुट की शिवसेना से, इस पर अभी सवाल बरकरार है। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे का ये कहना कि “इश्वर ने चाहा, तो बीएमसी मेयर का पद शिवसेना यूबीटी को जाएगा” महायुति खेमा में हलचल मचा रहा है।

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