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Maharashtra Political Crisis Updates: चुनाव-चिह्न पर पहुंची राजनीतिक लड़ाई, एकनाथ शिंदे ने किया ये दावा!

Maharashtra Political Crisis Updates: महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासी उथलपुथल अभी भी जारी है। शिवसेना (Shiv Sena) में उठे बगावत के सुर अब धीरे-धीरे तेज हो रहे हैं। शिवसेना से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) अपने साथ 40 विधायकों के समर्थन का भरोसा दे रहे हैं, तो वहीं इसके चलते शिवसेना अब दो खेमे में बंटती दिख रही है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे के साथ कई निर्दलीय विधायक भी हैं। ऐसे में शिंदे का सियासी खेमा काफी मजबूत दिख रहा है। तो वहीं, दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) अकेले पड़ते दिख रहे हैं।

एकनाथ शिंदे खेमे ने ठोका दावा

इन सबके बीच महाराष्ट्र में अब एक अलग ही राजनीतिक मोड़ सामने आया है, जिसके बाद लगता  है कि ये सियासी उथल-पुथल जल्द थमने वाली नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एकनाथ शिंदे खेमा अब शिवसेना के ‘धनुष और बाण’ चिह्न पर दावा करने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि गुट 41 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है और पार्टी के चुनाव-चिह्न के इस्तेमाल की मांग कर रहा है। कहा जा रहा है कि जल्द ही ये मामला चुनाव आयोग पहुंच सकता है।

ये भी पढ़ें: Maharashtra Political Crisis: फडणवीस के समर्थन में लगे पोस्टर, शिंदे ने पत्र शेयर करके सीएम उद्धव पर साधा निशाना

अब चुनाव-चिह्न पर होगा घमासान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एकनाथ शिंदे खेमा अब शिवसेना के ‘धनुष और बाण’ चिह्न पर दावा करने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि गुट 41 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है और पार्टी के चुनाव-चिह्न के इस्तेमाल की मांग कर रहा है। इसके बाद कहा जा रहा है कि जल्द ही ये मामला चुनाव आयोग पहुंच सकता है।

क्या है इस पर चुनाव आयोग का कानून

यहां पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि निर्वाचन आयोग राजनीतिक पार्टियों को मान्यता देता है और चुनाव चिह्न भी आवंटित करता है। चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के मुताबिक ये पार्टियों को पहचानने और चुनाव चिह्न आवंटित करने से जुड़ा है। कानून के मुताबिक अगर पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के दो गुटों में सिंबल को लेकर अलग-अलग दावें किए जाएं तो फिर ­ इस पर आखिरी फैसला करता है।

इस आधार पर फैसला लेता है चुनाव आयोग

विवाद के मामले में, चुनाव आयोग मुख्य रूप से पार्टी के संगठन और उसकी विधायिका विंग दोनों के भीतर प्रत्येक गुट के समर्थन का आकलन करता है। ये राजनीतिक दल के भीतर शीर्ष समितियों और निर्णय लेने वाले निकायों की पहचान करता है। ये पता लगाने की कोशिश की जाती है कि कितने सदस्य या पदाधिकारी किस गुट में वापस आ गए हैं। इसके बाद ये प्रत्येक कैंप में सांसदों और विधायकों की संख्या की गणना करता है।

उधर, एकनाथ शिंदे ने आज, यानी कि गुरुवार को ट्विटर पर एक पत्र साझा किया है। पार्टी से बगावत कर 40 के करीब पार्टी विधायकों के साथ गुवाहाटी में डेरा जमाए बैठे नेता ने पत्र साझा कर सीधे तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। शिंदे ने कहा कि ये विधायकों की भवना है।

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