Mamata Banerjee: चुनावी दहलीज पर खड़े बंगाल में सियासी पारा एक बार फिर आसमान छूता नजर आ रहा है। कोलकाता से लेकर वर्धमान, नॉर्थ 24 परगना, दीनाजपुर तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चर्चा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आज IPAC पर ईडी की छापेमारी से जुड़े प्रकरण में सुनवाई की है। इस दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने ममता बनर्जी, बंगाल डीजीपी, पुलिस आयुक्त और उपायुक्त को नोटिस जारी किया है। प्रवर्तन निदेशालय ने सभी पर जांच में हस्तक्षेप और बांधा डालने का आरोप लगाया था। इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। अब सवाल है कि क्या चुनाव से पहले ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? तो आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं।
IPAC मामले में सुप्रीम कोर्ट के तल्ख तेवर!
सुप्रीम कोर्ट में आज आईपैक पर ईडी की छापेमारी से जुड़े प्रकरण को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने IPAC में जांच के लिए प्रवेश करने वाले ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है।
बेंच की ओर से ममता बनर्जी, बंगाल पुलिस डीजीपी, पुलिस आयुक्त और पुलिस उपायुक्त को ईडी की याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के अधिकारियों द्वारा IPAC परिसर में जांच में जबरदस्ती हस्तक्षेप और बाधा डालने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि “प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें। दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करें। मामले की सुनवाई 3 फरवरी, 2026 को स्थगित की जाए। इस बीच, यह निर्देश दिया जाता है कि प्रतिवादी IPAC में लगे सीसीटीवी कैमरों और आसपास के क्षेत्रों की फुटेज वाले अन्य कैमरों को सुरक्षित रखें।” सुप्रीम कोर्ट की इस प्रतिक्रिया को लेकर सवालों के अंबार लग रहे हैं।
क्या विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ सकती हैं Mamata Banerjee की मुश्किलें?
इस सवाल का पुख्ता जवाब भविष्य के गर्भ में है। कानून विशेषज्ञों की मानें तो ईडी और बंगाल सरकार के बीच छिड़ी लड़ाई सूबे की सियासत में भूचाल ला सकती है। यदि प्रवर्तन निदेशालय ये साबित करने में कामयाब रहा कि IPAC पर छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी व बंगाल सरकार के अन्य कर्मचारियों ने बांधा डाला है, या दस्तावेज को नुकसान पहुंचाया है। तो ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि, अभी सबकी नजरें 3 फरवरी, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट आगे क्या कहता है।
