Homeराज्यउत्तर प्रदेशUp Election 2022: अखिलेश के 5 बड़े कदम जो बदल सकता है...

Up Election 2022: अखिलेश के 5 बड़े कदम जो बदल सकता है समीकरण, शिवपाल-ओवैसी को कोई जगह नहीं

यूपी चुनाव के लिए जंग तेज होती जा रही है जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है सियासी धुरंधर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हुए हैं एक तरफ अखिलेश यादव तो दूसरी तरफ सत्ता में काबिज योगी आदित्यनाथ। दोनों एक दूसरे पर हमलावर हैं और अपनी तारीफ कर 2022 का रण जीतना चाहते हैं। अखिलेश यादव के कई चौंकाने वाले फैसले सियासी समीकरण बदलने की ओर इशारा कर रहे हैं एक तो अखिलेश जाति आधार वाली छोटी पार्टियों से गठबंधन कर रहे हैं। दूसरी तरफ जनाधार वाले नेताओं के लिए सपा के दरवाजे खोल दिए हैं। तो पश्चिम यूपी में जाट मुस्लिम पर पकड़ मजबूत बनाने के लिए जयंत चौधरी को भी अपने साथ मिला लिया है। इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अखिलेश यादव के पांच बड़े वो दांव बताएंगे जो बीजेपी को टक्कर देने के लिए काफी अहम है।

अखिलेश बदल सकते हैं 22 का गणित ?

2017 और 2019 पहले कांग्रेस और उसके बाद बसपा लेकिन नतीजा सपा का निराशाजनक प्रदर्शन। लेकिन अब अखिलेश यादव ने नया खेल शुरू किया ना कांग्रेस और ना ही बसपा बल्कि इस बार जाति आधार वाली छोटी पार्टियों पर अखिलेश ने बड़ा दांव खेला है। पूर्वांचल में राजभर, कुर्मी और नोनिया समाज के वोट पाने के लिए अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर, संजय चौहान और कृष्णा पटेल कि अपना दल से गठबंधन किया है। रुहेलखंड और ब्रज में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव ने केशव दत्त मौर्य की महान दल से हाथ मिलाया है। तो पश्चिमी यूपी में जाट वोटों पर सेंधमारी के लिए जयंत चौधरी को अपने साथ मिला लिया है कुल मिलाकर अखिलेश छोटे दलों के साथ मिलकर सबसे बड़े राज्य में अपनी सरकार बनाना चाहते हैं। 2017 में बीजेपी ने भी छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव जीता और सरकार बनाई थी अखिलेश भी उसी राह पर चल दिए हैं।

दूसरे दल के नेता करेंगे कमाल ?

छोटे दलों के साथ गठबंधन तो अखिलेश यादव कर ही रहे हैं इसके अलावा दूसरी पार्टियों के नेताओं के लिए भी सपा के दरवाजे खोल दिए गए हैं। यूपी की बड़ी पार्टियों के बड़े जनाधार वाले नेताओं को अखिलेश सपा में शामिल कराने में कामयाब रहे हैं। रामअचल राजभर, लालजी वर्मा, आर एस कुशवाहा, कादिर राणा, त्रिभुवन, सलीम शेरवानी, अन्नू टंडन, राजाराम पाल, हरेंद्र मलिक, चौधरी वीरेंद्र सिंह और आर के चौधरी, केके गौतम समेत कई बड़े नेता अब तक सपा का हाथ थाम चुके हैं। पिछले करीब 3 महीने में अखिलेश यादव विपक्ष के 200 से ज्यादा नेताओं की सपा में एंट्री करा चुके हैं। आपको जानकर हैरानी होगी सीतापुर से बीजेपी के मौजूदा विधायक को भी अखिलेश यादव ने अपने साथ मिला लिया। लेकिन अखिलेश यादव की चाल हर किसी के समझ से परे है। अखिलेश यादव शिवपाल से दूरी बनाए रखे हुए हैं जिससे को सपा पर मुस्लिम और यादव परस्त होने के आरोपों से भी बचाते नजर आए हैं अखिलेश ने ओवैसी को अभी तक कोई तवज्जो नहीं दी। अखिलेश इस बात को अच्छे से समझ चुके हैं की सपा और बीजेपी की लड़ाई में मुस्लिम और यादव वोटर कहीं जाने वाले नहीं है वह सपा को ही वोट करेंगे इसलिए चाचा शिवपाल के लाख कहने के बाद भी अखिलेश ने उनकी पार्टी से कोई समझौता नहीं किया।

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