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Political News: वरुण गांधी और मेनका गांधी BJP राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर, क्या बीजेपी का साथ छोड़ करेंगे घर वापसी ?

अगले साल 5 राज्यों में होने वाले विधानसभआ चुनाव से पहले बीजेपी ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत 80 लोगों को शामिल किया गया है। लेकिन सांसद वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी लाइन के खिलाफ बार-बार बयान देने और अपनी ही सरकार पर सवाल खड़ा करने को लेकर वरुण गांधी के साथ मेनका गांधी पर भी गाज गिरी है।

BJP की कार्यकारिणी में कौन-कौन ?

खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने का दावा करने वाली बीजेपी ने अगले साल 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राष्ट्रीय टीम को घोषणा कर दी है। बीजेपी महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति के मुताबिक कार्यसमिति में 50 विशेष आमंत्रित सदस्य और 179 स्थाई आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं। जिनमें मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री, विधायक दल के नेता, पूर्व उप-मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, सह-प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री संगठन को जगह दी गई है। दरअसल, बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करती है और संगठन के कामकाज की रूपरेखा तय करती है। आपको बता दें कि कोविड महामारी की वजह से लंबे वक्त से कार्यसमिति की बैठक आयोजित नहीं हो पाई है।

वरुण की फायर ब्रांड नेता की छवि

भारतीय जनता पार्टी दवारा आज जारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भले ही वरूण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को बाहर कर पहले से पेशबंदी करने की बात पर पीठ थपथपाई जा रही हो, पर हक़ीक़त ये है कि मेनका व वरूण का मन भाजपा की सियासत से भर गया है। इसके लक्षण तो पिछले लोकसभा चुनाव से ही दिखने लगे थे। वरूण व मेनका को लेकर जो क़यास लगाये जा रहे हैं, वे अनायास नहीं है। पिछले कुछ दिनों के वरूण गांधी के ट्वीट पर गौर करेंगे तो आपको लगेगा कि वरुण गांधी अपनी ही पार्टी और नेताओं पर सवाल उठाकर विपक्ष को जहां हमले का मौका दे रहे हैं, वहीं उनके इस बर्ताव से आलाकमान नाराज भी बताया जा रहा है। वरुण गांधी का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो मोदी कैबिनेट में जिन नेताओं को खूब तवज्जो मिली है, वो कहीं आगे नजर आते हैं। 2019 के आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंदिरा गांधी से बेहतर बताने के बाद वरुण गांधी ही नहीं, उनकी मां और सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद मेनका गांधी को भी ऐसा तो नहीं ही लगा होगा कि सरकार बन जाने पर मंत्रिमंडल गठन न सही, विस्तार या फेरबदल की स्थिति में भी दोनों में से कोई एक भी कैबिनेट का हिस्सा नहीं होगा। जुलाई, 2021 में जब मोदी कैबिनेट 2.0 में फेरबदल होना था तो संभावितों की सूची में वरुण गांधी का भी नाम उछला था और उसकी पहली वजह तो यही समझ में आयी थी कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर को काबू में रखने के लिए, बीजेपी नेतृत्व के ऐसा करने से इनकार नहीं किया जा सकता। मोदी-शाह युग के अस्तित्व में आने के बहुत पहले से ही वरुण गांधी की फायर ब्रांड नेता की छवि रही है

सरकार पर सवाल उठाने की सजा ?

दरअसल, जब आज बीजेपी ने 80 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित की तो सबकी नजर इस बात पर की थी कि वरुण गांधी को इसमें जगह दी जाती है या नहीं। लेकिन जैसे ही कार्यकारिणी का ऐलान हुआ। उसमें न सिर्फ वरुण गांधी बल्कि उनकी मां मेनका गांधी को भी जगह नहीं दी गई। दरअसल, बीते कुछ समय से वरुण गांधी ना सिर्फ केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं बल्कि, लखीमपुर खीरी कांड को लेकर भी योगी सरकार के खिलाफ लगातार मुखर रहे हैं। लखीमपुर खीरी कांड में वरुण गांधी हर दिन ट्वीट करके योगी सरकार पर दबाव बनाते नजर आए हैं। पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने आज भी लखीमपुर कांड का नया वीडियो सामने आने के बाद ट्वीट किया था और अपनी ही सरकार को घेरते हुए लिखा था कि, ये वीडियो बिल्कुल शीशे की तरह साफ है। प्रदर्शनकारियों का मर्डर करके उनको चुप नहीं करा सकते। निर्दोष किसानों का खून बहाने की घटना के लिए जवाबदेही तय करनी ही होगी। माना जा रहा है कि पार्टी लाइन के खिलाफ बार-बार बयान देने की सजा राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखाकर दी गई है। राष्ट्रीय कार्यसमिति से वरुण, मेनका गांधी के अलावा बीजेपी के फायर-ब्रांड नेता रहे विनय कटियार को भी जगह नहीं दी गई है। जबकि दूसरे दलों से आए नेताओं को इसमें शामिल किया गया है। लेकिन देखना होगा ये कार्यकारिणी आने वाली चुनौतियों का सामना कैसे करती है और जिन लोगों को कार्यसमिति से बाहर किया गया उनकी नाराजगी आगे कैसी देखने को मिलती है।

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