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क्या हैं दल बदल कानून, महाराष्ट्र की राजनीति में विधायकों ने किया बीजेपी का रुख

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया बदलाव आ गया है। मंगलवार को शिवसेना के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे से संपर्क नहीं हो पाया। थोड़ी देर बाद पता चला कि एकनाथ के नेतृत्व में शिवसेना के दो दर्जन से ज्यादा विधायक गुजरात के सूरत में मौजूद हैं। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे अन्य बागी विधायक साथियों के साथ सूरत के मेरिडियन होटल से गुवाहाटी पहुंचे। गुवाहाटी पहुंचने के बाद एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना के 40 विधायक यही मौजूद हैं और हम बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व को आगे बढ़ाएंगे।

अयोग्य करार देने की मांग की जा सकती हैं

शिवसेना के विधायकों के अलावा एनसीपी और कांग्रेस के छोटे दलों और कुछ निर्दलीय विधायक भी सूरत में बताए गए हैं। अब सभी के मन में यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि बागी विधायक बीजेपी की तरफ अपना रुख क्यों कर रहे हैं। यदि विधायक बीजेपी की तरफ बढ़ रहे हैं तो शिवसेना विधानसभा स्पीकर के पास जाकर विधायकों को ‘दल बदल’ कानून के तहत अयोग्य करार देने की मांग की जा सकती है।

दल बदल कानून क्या है?

कानून के तहत तीन स्थितियां हैं। इनमें से किसी भी स्थिति में कानून का उल्लंघन सदस्य को भारी पड़ सकता है। विधायिका की पीठासीन अधिकारी ऐसे मामलों में फैसला करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इनके फैसले को उच्च अदालतों में चुनौती दी जा सकती है। एक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाला ‘स्वेच्छा से’ उस पार्टी की सदस्यता छोड़ दे या विधायिका में पार्टी की इच्छा के खिलाफ वोट करे। सदन के भीतर और बाहर जनप्रतिनिधि का आचरण इस बात को तय करने में मदद करता है कि सुरक्षा से सदस्यता छोड़ी गई है या नहीं।

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तीन स्थिति में होता दल बदल

दल बदल के मामलों पर फैसले की कोई समय सीमा तय नहीं है। कई बार ऐसा हुआ है कि फैसला लंबित रहा और संबंधित विधायक मंत्री बना दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में व्यवस्था कर दी थी कि आदर्श स्थिति में स्पीकर्स को 3 महीने के भीतर दलबदल याचिका पर फैसला लेना होगा। दल बदल कानून तब होता है जब तीन स्थितियों से सांसद और विधायक दल बदल करते हैं। पहली स्थिति में स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ने पर दलबदल होता है। दूसरी स्थिति में जब तक सांसद और विधायक निर्दलीय रूप से निर्वाचित हुए हैं और बाद में किसी पार्टी में शामिल हो जाते हैं तब दलबदल होता है। तीसरी स्थिति में जब विधायक या सांसद मनोनीत होते हैं और 6 महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल का दामन थामते हैं तो दलबदल होता है।

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