Artificial Intelligence: साल 2025 की भयावह यादें अभी भी कई लोगों के जहन में ताजा हैं। पिछला साल सैंकड़ों लोगों के लिए तबाही वाला साबित हुआ। हजारों लोगों ने अपना परिवार खो दिया और बहुत लोगों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तौर पर नुकसान पहुंचा। ऐसे में अगर आप 2026 को लेकर सोच रहे हैं कि अब सबकुछ ठीक हो जाएगा, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। दरअसल, इस साल 5 एआई टेक्नोलॉजी इंसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
Artificial Intelligence के जरिए क्लोनिंग और डीपफेक
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस साल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से क्लोनिंग और डीपफेक टेक्नोलॉजी काफी प्रगति कर सकती है। ऐसे में इंसानों की नकली वीडियो बनाना काफी आसान हो जाएगा। इसमें चेहरा और आवाज समान होगी, जिससे खतरा पनप सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पावर्ड ऑटोनोमस हथियार
वहीं, कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता से ऑटोनोमस हथियार विकसित किए जाएंगे। जोकि इंसानी आदेश के बिना खुद से फैसले ले सकते हैं। इससे बड़े लेवल लोगों की मौत हो सकती है।
जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी
भारत समेत दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक अब इंसानी डीएनए को बदल सकते हैं। इसके गलत उपयोग से बड़ी महामारी फैल सकती है।
जियो इंजीनियरिंग
उधर, रिपोर्ट्स की मानें, तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए सौर विकिरण प्रबंधन जैसी तकनीक ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने के लिए बनाई जा रही हैं। लेकिन इससे बारिश के चक्र, खेती और पर्यावरण में भारी असंतुलन हो सकता है।
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के जरिए इंसानी दिमाग को सीधे कंप्यूटर से कनेक्ट किया जा सकता है। इसके गलत इस्तेमाल पर इंसानी दिमाग को कंट्रोल भी किया जा सकता है।
इंसानी मूल्य और सेफ्टी जरूरी
आखिर में, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, जिसे एआई भी कहते हैं, भले ही कितना ही एडवांस और सुविधाजनक हो जाए। मगर फिर भी इंसानी मूल्यों और लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता रहनी चाहिए। वरना एआई इंसानों का सहायक बनने की बजाय इंसानों को आदेश देने वाला बन सकता है।
