Artificial Intelligence: नकली दिमाग, जिसे आसान भाषा में एआई कहते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का बढ़ता ट्रेंड हर आयु वर्ग को प्रभावित कर रहा है। हालांकि, इसका सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ी यानी जेन जी पर देखने को मिल रहा है। भले ही आप न जानते हो, मगर जेनरेटिव एआई ने जेन जी की रोजाना की लाइफ में काफी अहम जगह बना ली है। इसका फायदा और नुकसान दोनों ही युवा पीढ़ी की लाइफ को नई दिशा दे रहे हैं। मगर इसमें कई चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे में जेनरेटिव एआई को समझना काफी महत्वपूर्ण है।
Artificial Intelligence जेनरेटिव टूल्स कैसे रोजाना लाइफ का बन रहे हिस्सा
आपकी जानकारी में इजाफा करने के लिए बता दें कि जेनरेटिव एआई एक प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता है, जो नया कंटेंट बनाती है, जैसे- टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, ऑडियो, कोड आदि। यह केवल जानकारी ढूंढकर दिखाती नहीं है, बल्कि ट्रेनिंग लेने वाले पैटर्न के आधार पर नया आउटपुट भी तैयार करती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ओपनएआई का चैटजीपीटी है।
युवा पीढ़ी जेनरेटिव एआई का पढ़ाई में इस्तेमाल कर रही है। एआई टूल्स के जरिए कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सहायता मिल जाती है। जैसे- यूपीएससी, बैंकिंग और एसएससी आदि की तैयारी के दौरान छात्र एआई की मदद से नोट्स समरी, करंट अफेयर्स एक्सप्लेन और मॉक इंटरव्यू प्रैक्टिस कर सकते हैं। इतना ही नहीं, देश में कई भाषाएं हैं, ऐसे में एआई टूल्स की मदद से आसानी से किसी भी क्षेत्रीय लैंग्वेज में पढ़ाई की जा सकती है। ऐसे में जेनरेटिव एआई टूल्स के जरिए जेन जी पढ़ाई और नौकरी से लेकर अपनी रोजाना की जिंदगी में भी आसानी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जेनरेटिव से होने वाले फायदे और चुनौतियां
वहीं, जेनरेटिव एआई के फायदों की बात करें, तो इससे युवा पीढ़ी का काफी टाइम बच जाता है। साथ ही युवा पीढ़ी की प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिविटी को एक नई गति मिल सकती है। हालांकि, इसकी वजह से युवा पीढ़ी में कुछ चिंताएं भी देखने को मिल सकती हैं। भले ही जेनरेटिव एआई टूल्स ने रोजाना की लाइफ आसान करने का काम किया है, मगर इससे जेन जी की खुद सोचने की क्षमता में कम हो सकती है। साथ ही एकेडमिक ईमानदारी, डेटा प्राइवेसी के साथ गलत जानकारी की बढ़ोतरी हो सकती है।
