Noida International Airport: देश के सबसे चर्चित और एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के संचालन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। माना जा रहा है कि फरवरी के आखिरी तक या मार्च के शुरूआत में इस एयरपोर्ट की शुरूआत हो सकती है। गौरतलब है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काफी आधुनिक बनाया जा रहा है। सबसे खास बात है कि इस हवाई अड्डे का विकास ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी (स्विट्जरलैंड) द्वारा किया जा रहा है।
इसलिए, इसका बुनियादी ढांचा और प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होगा। जो यात्रियों को एक नया अनुभव देगा। सबसे खास बात है कि इस एयरपोर्ट से देश,दुनिया की फ्लाइटें संचालित होंगी। इसके अलावा दिल्ली एयरपोर्ट का भी दवाब कम होगा। सबसे खास बात है कि इस एयरपोर्ट पर सोलर एनर्जी के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी सुविधा कई गई है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
Noida International Airport पर होगी सोलर एनर्जी से लेकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग तक
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) भारत के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह केवल एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बनने जा रहा है। सबसे अहम बात है कि इस एयरपोर्ट को सोलर एनर्जी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट के साथ विकसित किया जा रहा है। अहम तौर पर एयरपोर्ट में सोलर एनर्जी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा।
एयरपोर्ट परिसर में सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे बिजली की जरूरतों का बड़ा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा किया जा सके। इसके उपयोग से पर्यावरण को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। यानि आधुनिकता के साथ-साथ बिजली की भी बचत होगी। इसके साथ ही एयरपोर्ट परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अत्याधुनिक व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर को बढ़ाने और जल संरक्षण के लिए उपयोग किया जाएगा।
कब शुरू हो सकता है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन
गौरतलब है कि बीते कई महीनों से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन को लेकर तारीखें सामने आई, लेकिन हर बार संचालन की तारीख आगे बढ़ दिया गया। वहीं अब इसके संचालन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। फरवरी के आखिरी तक या मार्च के शुरूआत में पीएम मोदी इसको हरी झंडी दिखा सकते है। हालांकि अधिकारिक तौर पर अभी इसकी घोषणा नहीं की गई है। एयरपोर्ट का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुसार किया जा रहा है। इसमें पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री और ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग होगा। जिससे बिजली की काफी बचत होगी। यरपोर्ट में वेस्ट मैनेजमेंट की स्मार्ट व्यवस्था होगी। गंदे पानी को ट्रीट करके दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। इससे पानी की बचत होगी और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा।
