क्या इस माइक्रो-चिप के जरिये दुनिया को अपने कब्जे में करना चाहता है चीन? आखिर China को क्यों चाहिये Taiwan?

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US-China Tension: रूस और यूक्रेन के बीच जंग के बाद अमेरिका और चीन में युद्ध की आशंका बार-बार दुनिया को डर के साये में डाल रही है। पहले कोविड-19 को जैविक हथियार के रूप में चीन द्वारा इस्तेमाल करने की संभावना बताकर पूर्व अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप का सख्त रवैया इसकी संभावना को जन्म दे रहा था, अब एक बार फिर ताइवान के मुद्दे पर दो सैन्य-संपन्न देश आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

ताइवान: अमेरिका-चीन के तंज का केंद्र

विश्व-शक्ति कहलाने की रेस में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा के भाव दशकों से विश्व-शांति के लिये चिंता का विषय रहे हैं लेकिन कोरोना काल के बाद वैश्विक-अर्थव्यवस्था में परिस्थितियां जिस प्रकार से बदली हैं, हर देश अपनी आर्थिक और सामरिक सुरक्षा के लिये सजग हो गया है। रूस का यूक्रेन पर हमला कुछ इसी प्रकार की पैदा हुई परिस्थितियों का परिणाम भी कहा जा सकता है, अब ताइवाइन को लेकर चीन-अमेरिका के बीच भी कुछ ऐसी ही स्थिति दिख रही है, जब से अमेरिकी कांग्रेस की प्रवक्ता नैंसी पेलोसी की ताइवान-यात्रा पर चीन ने अपनी कड़ी असहमति जाहिर की है। चीन का कहना है कि अमेरिका उसकी संप्रभुता को मुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका इससे इनकार करता है।

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ताइवान क्यों?

सवाल उठना लाजिमी है कि ताइवान एक छोटा द्वीप है, फिर इसपर विश्व की दो महाशक्तियां अपनी सैन्य-शक्ति खर्च करने की स्थिति में क्यों दिख रही हैं, आखिर यह छोटा-सा देश इन दोनों महाशक्तियों के लिये इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है? सवाल के जवाब में निम्न कुछ बातों पर ध्यान देना तस्वीर साफ कर देती हैः

1. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र राष्ट्र। इसलिये चीन के लिये यह उसकी शान का प्रश्न भी है।

2. ताइवान अमेरिका के बॉर्डर पर है, अमेरिका के सैन्य ठिकाने इससे महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर हैं। अगर चीन ने इसपर अपना कब्जा जमा लिया, तो यह अमेरिकी राज्यों में आसानी से घुसपैठ कर सकता है।

3. ताइवान में बनने वाले माइक्रो-चिप्स: लैपटॉप से लेकर स्मार्टफोन्स तक में प्रयोग किये जाने वाले चिप्स ताइवान में बनते हैं। चाहे वह गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंक्टर चिप्स हों या कम्प्यूटर या वीडियो गेम्स या कोई भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, ताइवान इन चिप्स का सबसे बड़ा मैनुफैक्चरर है और इंटरनेट की दुनिया से बंध चुकी पूरी दुनिया के लिये एक प्रकार से आज की धुरी बन चुकी है। अगर खुराफाती दिमाग लगाया जाये, इन चिप्स के जरिये दुनिया के किसी भी देश की सुरक्षा-व्यवस्था में सेंध लगायी जा सकती है। बल्कि इसलिये ताइवान पर कब्जा जमाना चीन के लिये दुनिया अपनी मुट्ठी में करने जैसा है।

उपर्युक्त दूसरे और तीसरे बिंदु पर गौर करें, तो अमेरिका के लिये दोनों ही लिहाज से चीन को ताइवान से दूर रखना लाजिमी हो जाता है। अमेरिका ने इसपर अपना रुख भी साफ कर दिया है और प्रेसिडेंट बनने के बाद जो बाइडन के एशियाई दौरे पर उन्होंने कहा था कि ताइवान को जरूरत पड़ने पर अमेरिका उसकी हर प्रकार से रक्षा करेगा।

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