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कजाकिस्तान में हुए CICA सम्मेलन में चीन और पाकिस्तान पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया जमकर हमला

पाकिस्तान जो अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से ही उसका साथ दे रहा हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जो तालिबान की लगातार वकालत कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान सरकार पर आर्थिक प्रतिबंध ना लगाने की गुहार कर रहे हैं। इसी बीच कजाकिस्तान में हुए सम्मेलन के जरिए एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद के ऊपर एक बार फिर चेतावनी दी और पाकिस्तान के दोस्त कहे जाने वाले चीन को सलाह दिया की वह दूसरे देशों में परियोजनाओं के नाम पर प्रोपैगेंडा फैलाने का प्रयास छोड़ दे।

जयशंकर ने कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरेक्शन एंड कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स इन एशिया सम्मेलन में पाकिस्तान को इशारा करते हुए बोला कि हिंसा, कट्टरता और उग्रवाद को बढ़ाने से कई बार अपने घर में भी आग लग जाती हैं। चीन के प्रोजेक्ट बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)पर जयशंकर ने कहा कि कनेक्टिव प्रोजेक्ट्स के केंद्र में सभी देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान होना चाहिए। भारत ने बीआरआई के अंतर्गत चल रहे चीन और पाकिस्तान इकोनॉमी कॉरीडोर का पहले भी विरोध किया हैं क्योंकि इस प्रोजेक्ट का एक सिरा पीओके से गुजरता हैं।

जयशंकर ने कहा कि सीआईसीए का लक्ष्य हैं शांति और विकास को जारी रखना पर इन दोनों चीजों का सबसे बड़ा दुश्मन हैं आतंकवाद। उन्होंने कहा कि आज के वक्त में कोई भी देश एक दूसरे के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, हमे इसके खिलाफ एक साथ खड़ा होना होगा और इसे एक गंभीर समस्या के रूप में लेना होगा जैसे कोरोना महामारी और जलवायु परिवर्तन को लिया गया था।

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आपको बता दे की सीआईसीए एक मल्टीनेशनल फोरम हैं, जिसे 1999 में कजाकिस्तान के नेतृत्व में स्थापित किया गया था, इस समूह का मुख्य कार्य हैं एशिया में सुरक्षा और स्थिरता को प्रमोट करना।

सीआईसीए की बैठक में जयशंकर ने यह भी कहा कि हमारा कॉन्टिनेंट “कनेक्टिविटी की कमी” से जूझ रहा हैं, इसमें सुधार करना हमारी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के लिए जरूरी हैं। हमें अंतराष्ट्रीय संबंधों को बनाए रखने के लिए कुछ बुनियादी सिद्धांतों को मनाना होगा, इसमें सबसे पहले आता हैं अपने पड़ोसी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को सम्मान देना। इसके साथ-साथ यह भी बहुत जरूरी हैं कि कनेक्टिविटी को कोई अपने एजेंडा की तरह ना उपयोग करे, भारत ने चीन द्वारा चलाए जा रहे बीआरआई में शामिल होने से इसी वजह से मना कर दिया था। भारत का कहना हैं कि चीन इसके जरिए विकाशील देशों के ऊपर कर्ज़ का एक जाल फैला रहा हैं।

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