India-Iran-Relation: क्या ईरान-भारत की दोस्ती में आई खटास? भारतीय जहाजों पर हमले से इंडिया में क्यों मचा हड़कंप, जानें सबकुछ

India-Iran-Relation: ईरान-भारत संबंधों में तनाव बढ़ने की खबरों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों पर हमले ने हड़कंप मचा दिया है। आखिर क्या है इस घटना की वजह और इसका भारत-ईरान रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

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फोटो क्रेडिट - AI जनरेटेड

India-Iran-Relation: बीते कुछ दिनों से भारत और ईरान के रिश्तों में लगातार मतभेद नजर आ रहा है। हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की तरफ से भारतीय जहाज पर गोलीबारी की गई थी। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता पर रोक लगने के बाद तेहरान एक बार फिर एक्टिव हो गया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर और सख्ती बढ़ा दी है। वहीं अब खबर सामने आ रही है कि ईरान की आईआरजीसी गॉर्डस ने दो जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन जहाजों को रोका, उनमें MSC-FRANCESCA और EPAMINONDAS शामिल हैं। EPAMINONDAS दुबई के जबेल अली पोर्ट से भारत के गुजरात की ओर जा रहा था। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। आईए समझते है इसके मायने।

क्या India-Iran-Relation में आई खटास?

अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के बाद भी भारत और ईरान के रिश्ते काफी अच्छे थे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कच्चे तेल और एलपीजी के जहाजों पर लगातार आवाजाही जारी थी। लेकिन हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों पर गोलीबारी की गई है। इसके अलावा गुजरात आ रहे एक जहाज को भी आईआरजीसी के गार्ड ने जब्त कर लिया और उसे वापस ले गए, जिसके बाद कई तरह के  सवाल खड़े हो रहे है कि क्या India-Iran-Relation के बीच सबकुछ अच्छा नहीं है? हालांकि ईरानी सरकार की तरफ से इसे लेकर किसी प्रकार की जानकारी सामने नहीं आई है। मालूम हो कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज वैश्विक तेल और व्यापार सप्लाई का अहम हिस्सा हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल ट्रूथ सोशल पर लिखा कि “ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करना चाहता, वे इसे खुला रखना चाहते हैं ताकि वे प्रतिदिन 50 करोड़ डॉलर कमा सकें (जो कि बंद होने पर उनका नुकसान होगा!)। वे इसे बंद रखने की बात सिर्फ इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मैंने इसे पूरी तरह से अवरुद्ध (बंद) कर दिया है, इसलिए वे केवल अपनी “इज्जत बचाना” चाहते हैं।

चार दिन पहले लोग मेरे पास आए और कहने लगे, “महोदय, ईरान जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना चाहता है। लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं, तो ईरान के साथ कभी कोई समझौता नहीं हो सकता, जब तक कि हम उनके देश के बाकी हिस्सों को, उनके नेताओं समेत, उड़ा न दें”!

 

 

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