Pakistan News: पड़ोसी मुल्क की स्थिति एक बार फिर बद से बदतर हो गई है। ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता के दौर में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा पाकिस्तान अब दर-दर की ठोकरें खा रहा है। इसकी प्रमुख वजह है संयुक्त अरब अमीरात का भारी-भरकम कर्ज जिसका भुगतान इसी माह पाकिस्तान को करना है।
इस्लामाबाद में जहां एक ओर शांति वार्ता की विफलता मुल्क के लिए आफत बनी, तो वहीं दूसरी ओर कर्ज का बोझ भी पीएम शहबाज शरीफ को भीख मांगने पर मजबूर कर रहा है। यही वजह है कि पड़ोसी मुल्क को फिर दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी हैं।
UAE का कर्ज लौटाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा पाकिस्तान!
इस्लामाबाद में शांति वार्ता का आयोजन कर चौधरी बन रहे पीएम शहबाज शरीफ की हेंकड़ी निकल गई है। आलम ये है कि शांति वार्ता की विफलता ने मुल्क पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। पाकिस्तान पर संयुक्त अरब अमीरात का कर्ज चुकाने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। पड़ोसी मुल्क के ऊपर यूएई का 3.5 अरब डॉलर कर्ज के रूप में है।
इसे चुकाने के लिए पाकिस्तान को अब दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब का दरवाजा खटखटाया और अब कर्ज के लिए चीन की ओर मुंह फिराए देख रहा है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज 3 अरब डॉलर ही है। ऐसे में ये भंडार कर्ज की रकम को भी नहीं पूरा कर सकता। यही वजह है कि मुल्क अब दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
शांति वार्ता की विफलता के बाद बैकफुट पर पीएम शहबाज!
पीएम शहबाज शरीफ इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका-ईरान के मध्य शांति वार्ता की विफलता के बाद बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान पर बड़ी मात्रा में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का कर्ज है। इससे निपटना शहबाज शरीफ के लिए गले की हड्डी बन गया है। संयुक्त अरब अमीरात को इस माह में ही कर्ज की रकम चुकानी है।
आलम ये है कि पाकिस्तान अब सऊदी और चीन जैसे देशों से फिर भीख मांगने लगा है। पाकिस्तान के पास महज तीन महीनों के आयात के लिए ही विदेशी मुद्रा भंडार है। ऐसे में मुल्क के समक्ष चुनौती बढ़ गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि शांति वार्ता के दौरान चौधरी बन रहे शहबाज शरीफ आगे क्या कदम उठाते हैं।
