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श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद भारत के लिए क्या बोल गए रानिल विक्रमसिंघे

श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि वह भारत के साथ रिश्‍ते मजबूत करने को लेकर आशान्वित हैं। यही नहीं, भीषण आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका की वित्‍तीय मदद के लिए रानिल विक्रमसिंघे ने पीएम मोदी को धन्‍यवाद दिया। कर्ज और गंभीर राजनीतिक संकट में फंसे श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के इस्‍तीफा देने के बाद विक्रमसिंघे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है।

विक्रमसिंघे ने कहा कि मैं भारत के साथ एक करीबी रिश्‍ता बनाना चाहता हूं। भारत के अरबों डॉलर की मदद की ओर इशारा करते हुए विक्रमसिंघे ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं। भारत ने कर्ज से जूझ रहे श्रीलंका की मदद के लिए 3 अरब डॉलर से ज्‍यादा के लोन, क्रेडिट लाइन और क्रेडिट स्‍वैप का वादा किया है। विक्रमसिंघे 6वीं बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने हैं। हालांकि वह अभी एक बार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं।

विक्रमसिंघे को राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने नया प्रधानमंत्री बनाया
बताया जा रहा है कि राजपक्षे परिवार के करीबी होने के नाते विपक्ष में होने के बाद भी विक्रमसिंघे को राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने नया प्रधानमंत्री बनाया गया है। श्रीलंका में अस्थिर और हिंसक राजनीतिक हालात को देखते हुए विक्रमसिंघे यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि राजपक्षे परिवार इस संकट से सुरक्षित निकल जाए। इस बीच श्रीलंका की एक अदालत ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और उनके बेटे, सांसदों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित 14 अन्य लोगों के देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया। कोलंबो की मजिस्ट्रेट अदालत ने महिंदा राजपक्षे, उनके बेटे एमपी नमल, और 14 अन्य पर यात्रा प्रतिबंध जारी किया।

इन लोगों ने प्रधानमंत्री के आधिकारिक घर के बाहर और उनके राष्ट्रपति कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमले किए थे। अटॉर्नी जनरल संजय राजरंतम ने अदालतों को पूर्व पीएम और अन्य पर प्रतिबंध लगाने के लिए सूचित किया था। अटॉर्नी पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमलों की जांच करने का निर्देश दिया है।

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राजपक्षे से पद छोड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी डटे
राजपक्षे के समर्थक डंडों और लोहे की सलाखों से लैस थे, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था। गंभीर आर्थिक संकट के बीच राजपक्षे से पद छोड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी एक महीने से अधिक समय से डेरा डाले हुए थे। जिन अन्य लोगों के खिलाफ यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें पूर्व मंत्री पवित्रा वन्नियाराची, कंचना जयरत्ने, रोहिता अबेगुणवर्धने, सनथ निशांत, अन्य सांसद और वरिष्ठ डीआईजी देशबंधु थेनाकून शामिल हैं।

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