Viral Video: सोशल मीडिया पर अपना दर्द सिर्फ बड़े ही नहीं अब बच्चे भी सुनाने लगे हैं। इंटरनेट पर एक वीडियो काफी चर्चा में है। इसमें एक छोटा सा स्कूली बच्चा अपनी समस्या के बारे में बता रहा है। जिस तरह से वो वीडियो बनाते हुए अपनी समस्या कह रहा है। वो दिल छूने वाला है। बच्चा साफ शब्दों में कह रहा है , जिस दिन वो देश का प्रधानमंत्री बना उस दिन इस समस्या को ही खत्म कर देगा। मासूम बच्चे की बातें और दर्द लोगों के सीधे दिल को छू रहा है। यही वजह है कि, वो भावुक भी हो रहे हैं। इसके साथ ही हंस भी रहा है।
स्कूली बच्चे ने बयां किया दर्द
इस दिल छूने वाले स्कूली बच्चे के वायरल वीडियो को Nargis Bano नाम के एक्स हैंडल से पोस्ट किया गया है। वीडियो में मासूम बता रहा है कि, वो स्कूल जाने के दौरान भारी बैग से परेशान हो जाता है।
देखें वीडियो
एक स्कूली बच्चे का दर्द सुनकर आप भी अपने बच्चों के बारे में सोचने पर मज़बूर हो जायेंगे ,
” 20 किलो का बैग हम रोज अपनी कंधे पर उठाते है , 6-7 घंटे स्कूल में पढ़ाई करते है , उसके बाद अपना भारी स्कूल बैग लेकर हम घर जाते है, अरे यार हम बच्चे थक जाते है , हमें भी अच्छी जिंदगी जीनी… pic.twitter.com/dWyXRkaurI
— Nargis Bano (@Nargis_Bano78) April 24, 2026
उसके कंधे दर्द करने लगते हैं। परेशान बच्चे का कहना है कि, ‘ 20 किलो का बैग हम रोज अपनी कंधे पर उठाते है , 6-7 घंटे स्कूल में पढ़ाई करते है , उसके बाद अपना भारी स्कूल बैग लेकर हम घर जाते है, अरे यार हम बच्चे थक जाते है , हमें भी अच्छी जिंदगी जीनी है, जब में प्रधानमंत्री बनूंगा तो स्कूल में बैग ले जाना बंद करवा दूंगा । बच्चे की अपील है कि, स्कूल में भारी बैग का कल्चर खत्म होना चाहिए। यही कारण है कि, वो खुद को प्रधानमंत्री बनने की बात कह रहा है।
Viral Video देख यूजर्स को हो रहा अफसोस
वायरल वीडियो में दिख रहा मासूम कौन है और ये वीडियो कहां की है? इसकी कोई भी आधिकारिक जानकारी तो मौजूद नहीं है। लेकिन इसे एक्स पर 24 अप्रैल को अपलोड किया गया है। इस वीडियो पर 8200 से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं। वहीं, तमाम सारे लोगों के कमेंट भी आ रहे हैं। एक यूजर लिखता है, ‘कितनी दुखद बात है बच्चे नहीं तो आंखें खोलने वाली बात कह दी विदेश में स्कूल के बच्चों के बैग में सिर्फ डायरी रहती है बाकी किताबें सभी स्कूल में रहते हैं।’ दूसरा लिखता है, ‘यह बच्चा बहुत दूर की सोच रहा है अरे हमारे प्रधान मंत्री की तरह सोचे जो शिक्षा को ही खत्म कर दे।’ तीसरा लिखता है, ‘शिक्षा पर सरकार को बच्चों के लिए क्या जरूरी है इस पर ध्यान देना चाहिए अगर 20 किलो का बोझ बच्चा नहीं उठा सकता तो उसे पर इतना भर देना सही नहीं है इसके लिए प्रावधान होना चाहिए जिस दिन जो पाठ या चैप्टर क्लास में पढ़ाया जाए उसी की किताबें ले जाना अनिवार्य हो।’
