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Hydrogen Fuel Cell: EV का Alternative जो India भूल गया! Toyota Mirai का क्या हुआ?

Hydrogen Fuel Cell: इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली कारें अधिक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। ऐसे में क्या है इंडिया का हाइड्रोजन मिशन और टोयोटा मिराई कार इंडिया में क्यों नहीं चल सकी।

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By: Amit Mahajan

Published: फ़रवरी 1, 2026 6:09 अपराह्न

Hydrogen Fuel Cell
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Hydrogen Fuel Cell: बीता साल कारों की बिक्री के लिए बहुत ही शानदार साबित हुआ। मगर अभी भी सबसे अधिक पेट्रोल कारों की सेल हुई। ऐसे में अभी भी फ्यूल वाली कारों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने नहीं ली है। अभी भी इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें आम लोगों के बजट से बाहर हैं। हालांकि, कई वाहन कंपनियों ने थोड़ी किफाएती रेंज में इलेक्ट्रिक कारों को उतारा है। मगर फिर, कारों की कम रेंज और उन्हें चार्ज करने की परेशानी आती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक कारों की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली कार एक बेहतर ऑप्शन हो सकती है।

क्या है हाइड्रोजन फ्यूल सेल

हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली कार में हाइड्रोजन भरा जाता है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली बनती है, उसी बिजली से कार की इलेक्ट्रिक मोटर चलती है। ऐसे में कार के एग्जॉस्ट से सिर्फ पानी निकलता है। ऐसे में कार बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं करती है और बैटरी की जगह पर फ्यूल सेल पर चलती है।

टोयोटा मिराई इंडिया में लॉन्च हुई, लेकिन किसी ने नहीं बताई, क्यों?

आपको बता दें कि टोयोटा मिराई कार दुनिया की सबसे फेमस हाइड्रोजन कार थी। कार सिर्फ 3 से 5 मिनट में रिफ्यूल हो जाती थी। सिंगल चार्ज पर 600 से अधिक किलोमीटर की रेंज देती थी। ईवी चार्जिंग की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल चार्जिंग के स्टेशन बिल्कुल नहीं है। साथ ही हाइड्रोजन की रिफ्यूलिंग अभी काफी महंगी पड़ती है।

हाइड्रोजन की अवसंरचना

जानकारी के मुताबिक, इंडिया में नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इसके उत्पादन, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट को समर्थन दिया जा रहा है। ऐसे में अगर इंडिया को हाइड्रोजन में ग्लोबल लीडर बनना है, तो कार्बन एमिशन को कम करना होगा। इसके लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं।

हाइड्रोजन लागत

अभी हाइड्रोजन की लागत काफी अधिक है, क्योंकि लागत सिर्फ फ्यूल की नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई चैन की होती है। ऐसे में उत्पादन, भंडारण, परिवहन और अंतिम उपयोग पर बात आती है। भारत में अभी ग्रीन हाइड्रोजन का दाम लगभग 300 से 450 रुपये प्रति किलोग्राम है।

क्या है ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का मुख्य मकसद, ग्रीन हाइड्रोजन का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है। फिर उद्योग और मार्केट तक इसकी सप्लाई करना और इसके निर्यात को बढ़ावा देना है। भारत का लक्ष्य है कि साल 2030 तक हाइड्रोजन के सेक्टर में ग्लोबल लीडर बना जाए।

हाइड्रोजन का क्या है भविष्य?

भारत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत पहले चरण में फर्टिलाइजर, रिफाइनरी में ग्रे, ग्रीन हाइड्रोजन शिफ्ट करना चाहेगा। साथ ही पायलट प्रोजेक्ट तौर पर इंडिया में हाइड्रोजन से चलने वाली बस और ट्रक को शुरू करना प्राथमिकता रहेगी।

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Amit Mahajan

अमित महाजन DNP India Hindi में कंटेंट राइटर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं.अमित ने सिंघानिया विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है. DNP India Hindi में वह राजनीति, बिजनेस, ऑटो और टेक बीट पर काफी समय से लिख रहे हैं. वह 3 सालों से कंटेंट की फील्ड में काम कर रहे हैं.
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